सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज और उससे अटैच SMS हॉस्पिटल में जूनियर और सीनियर फैकल्टी में पद के लिए तनाव दिख रहा है। रिटायर्ड होने के बाद पे-माइनस पेंशन पर वापस ज्वाइन करने वाले सीनियर फैकल्टी टीचिंग करने के बजाए ज्यादा फोकस यूनिट हेड या डिपार्टमेंट एचओडी की सीट लेने पर कर रहे हैं। इस कारण अब इन रिटायर्ड सीनियर के प्रति जूनियर में रोष है। हाल ही नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में ऐसा मामला सामने आया है। जहां हाल ही रिटायर हुए नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. धनंजय अग्रवाल को वापस नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है। यही नहीं उन्हें न केवल यूनिट हेड बनाया जा सकता है, बल्कि उन्हें डिपार्टमेंट का एचओडी पद भी देने की तैयारी चल रही है। इसे लेकर अब उन फैकल्टी मैम्बर्स में रोष है, जो यूनिट हेड बनने के लिए वेटिंग में है। इससे पहले एनिस्थिसिया डिपार्टमेंट और कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में भी ऐसा मामला सामने आया था। इसमें भी रिटायर हुए सीनियर प्रोफेसर को दोबारा नियुक्ति देने पर विवाद हो गया था। इमरजेंसी डिपार्टमेंट में हुआ था विवाद करीब एक साल पहले ऐसा ही मामला इमरजेंसी डिपार्टमेंट में हुआ था। जब एनिस्थिसिया डिपार्टमेंट से रिटायर हुए सीनियर प्रोफेसर डॉ. राजेश शर्मा को कॉलेज में दोबारा नियुक्ति दी गई। सरकार ने डॉ. राजेश शर्मा को प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति दी, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सरकार के आदेशों के विपरित जाकर उन्हें इमरजेंसी डिपार्टमेंट का एचओडी बना दिया। इस पद पर लगने के बाद मौजूदा फैकल्टी डॉ. बीपी मीणा, डॉ. राजेश शर्मा और मेडिकल कॉलेज प्रशासन में जबरदस्त विवाद हुआ था। लंबे समय तक चले विवाद के बाद आखिरकार कॉलेज प्रशासन ने डॉ. शर्मा को हटाकर दूसरी फैकल्टी डॉ. सतीश मीणा को इमरजेंसी एचओडी लगाया था। कार्डियोलॉजी विभाग में भी यूनिट हेड बनने की दौड़ में शामिल को किया था साइडलाइन कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में भी ऐसा ही विवाद देखने को मिला था। जहां सितंबर 2025 में रिटायर हुए सीनियर प्रोफेसर डॉ. शशिमोहन शर्मा को दोबारा नियुक्ति देने के बाद कॉलेज प्रशासन ने यूनिट हेड बना दिया था। जबकि डॉ. शशिमोहन शर्मा के रिटायर होने के बाद डॉ. सोहन कुमार शर्मा यूनिट हेड बनने की दौड़ में थे। परंतु कॉलेज प्रशासन ने डॉ. सोहन कुमार शर्मा को साइडलाइन कर दिया था।


