अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के तहत KGMU परिसर में मंगलवार को विशेष जल योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्विमिंग पूल में डॉक्टरों, योग प्रशिक्षकों और छात्रों ने पानी के भीतर विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। इस मौके पर लखनऊ विश्वविद्यालय के योग विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ. अमरजीत यादव अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। डॉ.अमरजीत यादव ने बताया कि प्लाविनी प्राणायाम योग की एक विशेष तकनीक है। इसमें सांस को नियंत्रित तरीके से लेने का अभ्यास कराया जाता है, जिससे शरीर की तैरने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इसके नियमित अभ्यास से फेफड़े मजबूत होते हैं, तनाव कम होता है और मानसिक संतुलन बेहतर होता है। पानी में किए कई योगासन कार्यक्रम में योग विभाग के पूर्व छात्र दुर्गेश गौड़ ने पानी में ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, पद्मासन और मकरासन समेत कई योगासनों का प्रदर्शन किया। वहीं डॉ. अमित आर्या ने जल योग और प्लाविनी प्राणायाम का अभ्यास करके दिखाया। छात्रों ने भी अलग-अलग योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया। योग लोगों को जोड़ने का माध्यम KGMU के प्रॉक्टर डॉ. आर.ए.एस. कुशवाहा ने कहा कि योग सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने का भी काम करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। युवाओं को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए योग KGMU की डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रश्मि कुशवाहा ने कहा कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है। उन्होंने युवाओं से योग को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की अपील की। कार्यक्रम में डॉ. भास्कर अग्रवाल, डॉ. पंकज, डॉ. आर.के. दीवान, डॉ. समीर गुप्ता सहित कई डॉक्टर, शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।


