बिना शराब पिए खून में कैसे आ जाता है अल्कोहल, जानिए क्या है Auto-brewery Syndrome

बिना शराब पिए खून में कैसे आ जाता है अल्कोहल, जानिए क्या है Auto-brewery Syndrome

Auto-Brewery Syndrome Symptoms: सोचिए कि किसी इंसान ने शराब की एक बूंद भी न छुई हो, लेकिन फिर भी उसका शरीर ऐसा बर्ताव करे जैसे उसने शराब पी रखी हो। सुनने में यह किसी जादू या अजीब सी कहानी जैसा लगता है न? लेकिन मेडिकल साइंस में यह एक बेहद दुर्लभ बीमारी है, जिसे ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम (Auto-brewery Syndrome) या गट फर्मेंटेशन सिंड्रोम कहा जाता है। आइए समझते हैं कि आखिर बिना शराब पिए भी खून में अल्कोहल कैसे आ जाता है और क्या होता है यह सिंड्रोम?

क्या होता है ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, इस बीमारी में इंसान के पेट में खुद ही शराब बनने लगती है। जब इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति रोटी, चावल, आलू या मीठी चीजें (यानी कार्बोहाइड्रेट और शुगर) खाता है, तो उसका पाचन तंत्र (digestive system) खाने को पचाने के बजाय उसे अल्कोहल (इथेनॉल) में बदल देता है। यह अल्कोहल सीधे मरीज के खून में मिल जाता है, जिससे उसे बिना शराब पिए ही बिल्कुल वैसा ही नशा चढ़ जाता है जैसे शराब पीने पर चढ़ता है।

बिना शराब पिए खून में कैसे आ जाता है अल्कोहल?

हमारे पेट और आंतों में करोड़ों छोटे-छोटे बैक्टीरिया और फंगस (यिस्ट) रहते हैं, जो खाना पचाने में मदद करते हैं। सामान्य तौर पर ये बहुत कम मात्रा में अल्कोहल बनाते हैं, जिससे शरीर पर कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों के पेट में एक खास तरह का फंगस (जैसे Saccharomyces cerevisiae, जिसे बिकर्स यिस्ट भी कहते हैं) या कुछ बैक्टीरिया बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं।

जब मरीज कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाना खाता है, तो यह फंगस उस खाने के साथ मिलकर फर्मेंटेशन (किण्वन या सड़ने की प्रक्रिया) शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया से भारी मात्रा में शुद्ध इथेनॉल (शराब) बनती है, जिसे आंतें सोख लेती हैं और वह सीधे खून में पहुंच जाती है।

ऑटो-ब्रूअरी सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?

  • बिना पिए भी सांसों से शराब की बदबू आना।
  • चक्कर आना, सिर घूमना और चलने में संतुलन खो देना।
  • बोलते समय आवाज का लड़खड़ाना।
  • मानसिक भ्रम (confusion) होना या मूड का अचानक बदल जाना।
  • नशा उतरने के बाद तेज सिरदर्द, थकान और उल्टी (यानी हैंगओवर) होना।

यह बीमारी क्यों और किसे होती है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह बीमारी आमतौर पर किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ने पर होती है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं;

1. एंटीबायोटिक्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल- जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक या भारी मात्रा में एंटीबायोटिक्स लेता है, तो पेट के अच्छे और जरूरी बैक्टीरिया मर जाते हैं। इसका फायदा उठाकर पेट में फंगस (यिस्ट) तेजी से बढ़ा लेता है।

2. पेट से जुड़ी बीमारियां- जिन लोगों को क्रोहन डिजीज (Crohn’s disease), अल्सरेटिव कोलाइटिस या चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याएं होती हैं, उनमें इसका खतरा बढ़ जाता है।

3. डायबिटीज और मोटापा- जिन लोगों को शुगर की बीमारी (Diabetes) या लीवर से जुड़ी समस्याएं (जैसे फैटी लीवर) होती हैं, उनके पेट में फंगस को पनपने के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल मिलता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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