अररिया का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 92.54% पहुंचा:डीएम बोले-अगले वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करें

अररिया का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 92.54% पहुंचा:डीएम बोले-अगले वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करें

अररिया जिला समाहरणालय के परमान सभागार में डीएम विनोद दूहन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें वरीय उप समाहर्ता (बैंकिंग), अग्रणी जिला प्रबंधक और विभिन्न बैंकों के जिला समन्वयक व शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे। बैठक में डीएम ने विभिन्न बैंकिंग योजनाओं, ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान अररिया जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो 92.54 प्रतिशत पाया गया, जो बिहार राज्य के औसत 87.94 प्रतिशत से बेहतर है। इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए, डीएम विनोद दूहन ने सभी बैंकों को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक सीडी रेशियो को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का निर्देश दिया। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना की समीक्षा भी की गई, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र के किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराना है। बताया गया कि जिले में लगभग 1.78 लाख पंजीकृत किसानों को केसीसी से जोड़ा जाना है। पशुपालन के लिए प्रति पशु 32,000 रुपये तक का केसीसी ऋण दिया जा सकता है। बैंकों को केसीसी लोन वितरण में तेजी लाएं डीएम ने सभी बैंकों को केसीसी ऋण वितरण में तेजी लाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। बैठक में लंबित आवेदनों के शीघ्र निपटारे पर भी जोर दिया गया। भारतीय ओवरसीज बैंक द्वारा केसीसी आवेदनों के निपटारे में सुस्ती बरतने पर डीएम ने नाराजगी जताई और सुधारात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। डीएम ने सभी बैंकों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप ऋण स्वीकृति और वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार करें उनके विरुद्ध उच्चाधिकारियों को कार्रवाई हेतु पत्र भेजने का फैसला लिया गया। बैठक के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा के कुछ शाखा प्रबंधकों की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। डीएम ने संबंधित बैंकों के उच्चाधिकारियों को उचित कार्रवाई के लिए पत्र जारी करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने सभी बैंक अधिकारियों से अपील की कि कार्यप्रणाली में सुधार लाकर सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग करें, ताकि जिले के अंतिम छोर तक वित्तीय सेवाएं पहुंच सकें। अररिया जिला समाहरणालय के परमान सभागार में डीएम विनोद दूहन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें वरीय उप समाहर्ता (बैंकिंग), अग्रणी जिला प्रबंधक और विभिन्न बैंकों के जिला समन्वयक व शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे। बैठक में डीएम ने विभिन्न बैंकिंग योजनाओं, ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान अररिया जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो 92.54 प्रतिशत पाया गया, जो बिहार राज्य के औसत 87.94 प्रतिशत से बेहतर है। इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए, डीएम विनोद दूहन ने सभी बैंकों को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक सीडी रेशियो को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का निर्देश दिया। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना की समीक्षा भी की गई, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र के किसानों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराना है। बताया गया कि जिले में लगभग 1.78 लाख पंजीकृत किसानों को केसीसी से जोड़ा जाना है। पशुपालन के लिए प्रति पशु 32,000 रुपये तक का केसीसी ऋण दिया जा सकता है। बैंकों को केसीसी लोन वितरण में तेजी लाएं डीएम ने सभी बैंकों को केसीसी ऋण वितरण में तेजी लाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। बैठक में लंबित आवेदनों के शीघ्र निपटारे पर भी जोर दिया गया। भारतीय ओवरसीज बैंक द्वारा केसीसी आवेदनों के निपटारे में सुस्ती बरतने पर डीएम ने नाराजगी जताई और सुधारात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। डीएम ने सभी बैंकों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप ऋण स्वीकृति और वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार करें उनके विरुद्ध उच्चाधिकारियों को कार्रवाई हेतु पत्र भेजने का फैसला लिया गया। बैठक के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा के कुछ शाखा प्रबंधकों की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। डीएम ने संबंधित बैंकों के उच्चाधिकारियों को उचित कार्रवाई के लिए पत्र जारी करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने सभी बैंक अधिकारियों से अपील की कि कार्यप्रणाली में सुधार लाकर सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग करें, ताकि जिले के अंतिम छोर तक वित्तीय सेवाएं पहुंच सकें।  

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