खरीफ महाभियान 2026 के तहत जिला स्तरीय वर्कशॉप:औरंगाबाद में 1.72 लाख हेक्टेयर में होगी धान की खेती, किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का मिला संदेश

खरीफ महाभियान 2026 के तहत जिला स्तरीय वर्कशॉप:औरंगाबाद में 1.72 लाख हेक्टेयर में होगी धान की खेती, किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का मिला संदेश

औरंगाबाद जिला मुख्यालय स्थित अनुग्रह नारायण नगर भवन में आज जिला स्तरीय शारदीय (खरीफ) महाभियान 2026 के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने खरीफ महाभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी। इन्होंने बताया कि किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण देकर उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना और परंपरागत खेती के साथ नई तकनीक आधारित फसलों को बढ़ावा देना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि जिले में इस साल 1.72 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा इस साल खरीफ मौसम में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं राज्य योजना के तहत जिले में 50 एकड़ में स्वीट कॉर्न, 85 एकड़ में बेबी कॉर्न, 225 एकड़ में संकर धान और 25 एकड़ में संकर मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा रागी (मडुआ) 1000 एकड़, सावां 100 एकड़ और रामदाना 250 एकड़ क्षेत्र में उगाने की योजना बनाई गई है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिलेट्स और प्राकृतिक खेती पर जोर अपने संबोधन में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा कि सभी कृषि कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर किसानों तक योजनाओं और तकनीकी जानकारियों को पारदर्शिता के साथ पहुंचाएं। उन्होंने किसानों से धान के अलावा मोटे अनाज, स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, मडुआ, ज्वार और सावां जैसी फसलों की खेती करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला पदाधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत जिले में तीन क्लस्टरों के अंतर्गत 150 एकड़ भूमि पर 375 किसानों की ओर से प्राकृतिक पद्धति से सुगंधित धान की खेती की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित खेती अपनाने की अपील कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस पुस्तक में जिले के विभिन्न प्रखंडों की मिट्टी की स्थिति, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई है। अभिलाषा शर्मा ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने और उसी के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिना मिट्टी जांच के उर्वरकों का प्रयोग समय, श्रम और धन की बर्बादी है। किसी एक उर्वरक के अत्यधिक उपयोग से अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित होती है और फसल उत्पादन में कमी आ सकती है। उन्होंने किसानों को कम से कम 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर प्राकृतिक अथवा जैविक खेती अपनाने की सलाह दी। कार्यशाला में जिला उद्यान पदाधिकारी ने उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी दी, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, धान की सीधी बुआई, मिलेट्स एवं अरहर उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि समन्वयक एवं विभागीय कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज, जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. श्रीकांत, सहायक निदेशक रसायन दीपक कुमार, सहायक निदेशक पौधा संरक्षण रॉकी रावत, आत्मा के उप परियोजना निदेशक राजेंद्र कुमार, भूमि संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक राजीव रंजन सहित कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वैज्ञानिक और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। औरंगाबाद जिला मुख्यालय स्थित अनुग्रह नारायण नगर भवन में आज जिला स्तरीय शारदीय (खरीफ) महाभियान 2026 के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने खरीफ महाभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी। इन्होंने बताया कि किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण देकर उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना और परंपरागत खेती के साथ नई तकनीक आधारित फसलों को बढ़ावा देना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि जिले में इस साल 1.72 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा इस साल खरीफ मौसम में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं राज्य योजना के तहत जिले में 50 एकड़ में स्वीट कॉर्न, 85 एकड़ में बेबी कॉर्न, 225 एकड़ में संकर धान और 25 एकड़ में संकर मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा रागी (मडुआ) 1000 एकड़, सावां 100 एकड़ और रामदाना 250 एकड़ क्षेत्र में उगाने की योजना बनाई गई है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिलेट्स और प्राकृतिक खेती पर जोर अपने संबोधन में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने कहा कि सभी कृषि कर्मी प्रशिक्षण प्राप्त कर किसानों तक योजनाओं और तकनीकी जानकारियों को पारदर्शिता के साथ पहुंचाएं। उन्होंने किसानों से धान के अलावा मोटे अनाज, स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, मडुआ, ज्वार और सावां जैसी फसलों की खेती करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। जिला पदाधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत जिले में तीन क्लस्टरों के अंतर्गत 150 एकड़ भूमि पर 375 किसानों की ओर से प्राकृतिक पद्धति से सुगंधित धान की खेती की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित खेती अपनाने की अपील कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस पुस्तक में जिले के विभिन्न प्रखंडों की मिट्टी की स्थिति, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई है। अभिलाषा शर्मा ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने और उसी के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिना मिट्टी जांच के उर्वरकों का प्रयोग समय, श्रम और धन की बर्बादी है। किसी एक उर्वरक के अत्यधिक उपयोग से अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित होती है और फसल उत्पादन में कमी आ सकती है। उन्होंने किसानों को कम से कम 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर प्राकृतिक अथवा जैविक खेती अपनाने की सलाह दी। कार्यशाला में जिला उद्यान पदाधिकारी ने उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी दी, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, धान की सीधी बुआई, मिलेट्स एवं अरहर उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि समन्वयक एवं विभागीय कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज, जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. श्रीकांत, सहायक निदेशक रसायन दीपक कुमार, सहायक निदेशक पौधा संरक्षण रॉकी रावत, आत्मा के उप परियोजना निदेशक राजेंद्र कुमार, भूमि संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक राजीव रंजन सहित कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वैज्ञानिक और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।  

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