TVK vs DMK: 6 महीने का वादा टूटा, CM थलापति विजय के खिलाफ M.K. स्टालिन ने खोला मोर्चा

TVK vs DMK: 6 महीने का वादा टूटा, CM थलापति विजय के खिलाफ M.K. स्टालिन ने खोला मोर्चा

MK Stalin Statement: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जिस पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन (M. K. Stalin) ने नई सरकार को 6 महीने का समय देने की बात कही थी, वही अब महज तीन महीने में ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की सरकार पर खुलकर हमला बोलते नजर आ रहे हैं। यह बदलाव राज्य की सियासत में बढ़ते तनाव और नई राजनीतिक टकराहट का साफ संकेत माना जा रहा है।

6 महीने का वादा, 3 तीन माह में ही बदलाव

स्टालिन ने पहले कहा था कि TVK सरकार पर तुरंत आलोचना नहीं करेंगे और उसे काम करने के लिए छह महीने का समय देंगे। लेकिन हालात बदलने के बाद अब उनका रुख सख्त हो गया है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में चुप रहना संभव नहीं है। चेन्नई में आयोजित एक राजनीतिक सभा में उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले कहा था कि TVK की अगुवाई वाली सरकार की आलोचना करने से पहले हमें छह महीने का इंतजार करना चाहिए, लेकिन राज्य की मौजूदा परिस्थितियां इस बात की इजाजत नहीं देतींl’

नई सरकार की कार्यशैली पर सवाल

यह बयान उन्होंने उस सभा में दिया, जहां पूर्व वीसीके विधायक पनैयुर बाबू को डीएमके में शामिल कराया गया। इसी मौके पर स्टालिन ने नई सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन कमजोर है और हर वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है मुझे डर है, आज तमिलनाडु में हालात ऐसे बन चुके हैं कि सरकार के गठन के 3 महीने के भीतर ही उसकी आलोचना करना बेहद जरूरी हो गया है। सरकार इस वक्त जिस लचर तरीके से चलाई जा रही है, उसने हर वर्ग को निराश किया है और विभिन्न हलकों से इसकी आलोचना शुरू हो गई है।’

चुनावी हार से बदला सियासी समीकरण

साल 2026 के विधानसभा चुनाव में 4 मई को आए नतीजों में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद 10 मई 2026 को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने सी. जोसेफ विजय को 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई थी। वहीं, एम. के. स्टालिन को 2021 में 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ मिली थी, लेकिन 5 मई 2026 को चुनाव हारने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

TVK की जीत ने DMK के पारंपरिक वोट बैंक, खासकर युवा और महिला मतदाताओं को प्रभावित किया है। वहीं VCK और अन्य संगठनों का DMK के साथ आना यह दिखाता है कि स्टालिन अब नए सिरे से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं।

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