दरभंगा नगर निगम की ओर से वी-के रोड स्थित दुकानों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वार्ड संख्या-44 के पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनके साथ कई अन्य पार्षदों और जनप्रतिनिधियों ने भी आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग का समर्थन किया। पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने आरोप लगाया कि दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है और निर्धारित नियमों और मानकों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी जिला प्रशासन और प्रमंडलीय आयुक्त को आवेदन देकर जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारी के खिलाफ होगी कार्रवाई ज्ञापन में कहा गया है कि आवंटन प्रक्रिया में पात्रता, चयन प्रक्रिया, वरीयता सूची और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। पार्षदों ने मांग की है कि आवंटन से जुड़े सभी अभिलेखों, चयन सूची, पात्रता मानदंड और वित्तीय पहलुओं की भी गहन जांच कराई जाए। राकेश रौशन चौधरी ने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग ज्ञापन सौंपने के दौरान नगर निगम की उपमहापौर नजिया हसन, वार्ड-27 के पार्षद गंगा मंडल, वार्ड-45 के पार्षद देव कृष्ण झा, वार्ड-23 की पार्षद चांदनी देवी, वार्ड-31 के पार्षद नफीसुल हक रिंकू और वार्ड-11 की पार्षद सोनी पूर्वे मौजूद थीं। सभी जनप्रतिनिधियों ने आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस मुद्दे को प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष उठाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर पटना जाकर संबंधित विभाग और उच्च अधिकारियों से भी शिकायत करेंगे। उन्होंने कहा, “यह मामला आम लोगों के अधिकारों और नगर निगम की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे।” फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नगरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं। दुकान आवंटन को लेकर उठे आरोपों के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। दरभंगा नगर निगम की ओर से वी-के रोड स्थित दुकानों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वार्ड संख्या-44 के पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनके साथ कई अन्य पार्षदों और जनप्रतिनिधियों ने भी आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग का समर्थन किया। पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने आरोप लगाया कि दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है और निर्धारित नियमों और मानकों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी जिला प्रशासन और प्रमंडलीय आयुक्त को आवेदन देकर जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारी के खिलाफ होगी कार्रवाई ज्ञापन में कहा गया है कि आवंटन प्रक्रिया में पात्रता, चयन प्रक्रिया, वरीयता सूची और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। पार्षदों ने मांग की है कि आवंटन से जुड़े सभी अभिलेखों, चयन सूची, पात्रता मानदंड और वित्तीय पहलुओं की भी गहन जांच कराई जाए। राकेश रौशन चौधरी ने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग ज्ञापन सौंपने के दौरान नगर निगम की उपमहापौर नजिया हसन, वार्ड-27 के पार्षद गंगा मंडल, वार्ड-45 के पार्षद देव कृष्ण झा, वार्ड-23 की पार्षद चांदनी देवी, वार्ड-31 के पार्षद नफीसुल हक रिंकू और वार्ड-11 की पार्षद सोनी पूर्वे मौजूद थीं। सभी जनप्रतिनिधियों ने आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पार्षद राकेश रौशन चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला प्रशासन से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस मुद्दे को प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष उठाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर पटना जाकर संबंधित विभाग और उच्च अधिकारियों से भी शिकायत करेंगे। उन्होंने कहा, “यह मामला आम लोगों के अधिकारों और नगर निगम की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे।” फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नगरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं। दुकान आवंटन को लेकर उठे आरोपों के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।


