सिरदर्द को न करें नजरअंदाज, दिमाग की खामोश बीमारी बन सकती है बड़ा खतरा

सिरदर्द को न करें नजरअंदाज, दिमाग की खामोश बीमारी बन सकती है बड़ा खतरा

World Brain Tumor Day: हर साल 8 जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षणों, समय पर जांच और आधुनिक उपचार सुविधाओं के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ब्रेन ट्यूमर के निदान किए जाने वाले मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसका एक बड़ा कारण एमआरआई जैसी जांच सुविधाओं की बढ़ती उपलब्धता और लोगों में जागरुकता का बढऩा है।

छत्तीसगढ़ के बड़े चिकित्सा संस्थानों में हर वर्ष सैकड़ों मरीजों का परीक्षण और बड़ी संख्या में सर्जरी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार सिरदर्द, दौरे पडऩा, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या व्यवहार में बदलाव जैसे संकेतों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश मरीजों के बेहतर परिणाम संभव हैं।

बढ़ रहे मरीज

पिछले पांच वर्षों में ब्रेन ट्यूमर के मामलों के लिए छत्तीसगढ़ के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन न्यूरोसर्जनों का अनुभव बताता है कि निदान होने वाले मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। एम्स रायपुर सहित राज्य के प्रमुख अस्पतालों में बढ़ती मरीज संख्या इसे दर्शाती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अधिक नजरअंदाज किया जाने वाला लक्षण लगातार बढ़ता सिरदर्द है। सुबह उठते समय सिरदर्द होना, उल्टी के साथ सिरदर्द, हाथ या पैर में कमजोरी, दौरे पडऩा, याददाश्त में कमी, दृष्टि धुंधली होना और व्यवहार में बदलाव भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। अधिकांश मरीज इन्हें माइग्रेन, गैस, सर्वाइकल या तनाव का असर मानकर महीनों तक टालते रहते हैं।

छत्तीसगढ़ में यहां हैं सुविधाएं

छत्तीसगढ़ में एम्स रायपुर, डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आईटीएसए हॉस्पिटल और बालको मेडिकल सेंटर जैसे संस्थानों में माइक्रोस्कोपिक ब्रेन ट्यूमर सर्जरी, एंडोस्कोपिक स्कल बेस सर्जरी, न्यूरो-नेविगेशन, इमेज-गाइडेड सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि ग्रामीण मरीजों के लिए समय पर एमआरआई, विशेषज्ञ तक पहुंच, यात्रा खर्च और उपचार के दौरान आय का नुकसान अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

आयुष्मान से इलाज संभव

समय पर इलाज होने पर बेनाइन ट्यूमर के मामलों में 85 से 95 प्रतिशत तक अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। वहीं मैलिग्नेंट ट्यूमर में सफलता ट्यूमर के प्रकार, ग्रेड और निदान के समय पर निर्भर करती है। उपचार का खर्च सामान्यत: 5 से 8 लाख रुपए तक हो सकता है, हालांकि यह ट्यूमर के प्रकार और उपचार प्रक्रिया के अनुसार बदलता है। राज्य के प्रमुख अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत भी उपचार सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

  • डॉ. अभिजीत कुमार कोहाट, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, इट्सा हॉस्पिटल रायपुर

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