BHU News: पंडित मदन मोहन मालवीय की बगिया काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार चर्चा विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित बिरला छात्रावास को लेकर है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन धरोहर के साथ खिलवाड़ कर रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि 3 फीट के छात्रावास की बाउंड्री को तोड़कर विश्वविद्यालय प्रशासन 9 फीट की करने जा रहा है, जिसके बाद छात्रों ने विरोध स्वरूप कुलपति को ज्ञापन सौंपा है।
केंद्रीय कार्यालय के पास छात्रों का प्रदर्शन
वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के पास एकत्रित हुए बिरला छात्रावास के छात्र और छात्र नेताओं ने कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय छात्रावास की बाउंड्री को तोड़कर और ऊंचा कर रहा है, जिससे छात्रावास का भव्य स्वरूप खतरे में आ जाएगा। छात्रों ने बताया कि बिरला छात्रावास विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और विशिष्ट स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण प्रतीक है। छात्रों ने बताया कि यह छात्रावास केवल एक आवासीय परिसर ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न अंग भी है, इसके साथ खिलवाड़ ना किया जाए।
बिरला छात्रावास में रहने वाले छात्र ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ने में लगा हुआ है। इससे पहले रुईया छात्रावास को भी तोड़कर ऊंचा किया गया, जिसके बाद उस छात्रावास की सुंदरता समाप्त हो गई। छात्र ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर छात्रों को जेल की चार दिवारी के अंदर कैद करना चाहता है। छात्रों का कहना है कि 3 फीट की दीवार में शिक्षार्थी रहते हैं। अब छात्रों को 9 फीट ऊंची दीवार में में कैदियों की तरह रखने की तैयारी की जा रही है।
धरोहरों को संरक्षित रखना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी
छात्रों ने कुलपति को दिए ज्ञापन में कहा है कि वर्तमान में बिरला छात्रावास परिसर में चल रहे निर्माण कार्य और संरचनात्मक बदलावों के कारण इसकी मूल वास्तु कला और ऐतिहासिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। छात्रावास की विशिष्ट पहचान उसके विस्तृत खुले परिसर, पारंपरिक स्थापत्य शैली में ही निहित रही है, जिसे संरक्षित रखना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी भी है। इन्हीं बातों को लेकर छात्र सेंट्रल ऑफिस के पास एकत्रित हुए और कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। वही इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन है अपना स्पष्टीकरण नहीं जारी किया है।


