बिहार MLC चुनाव, नामांकन का आज आखिरी दिन:पवन सिंह, निशांत कुमार सहित सभी कैंडिडेट करेंगे नामांकन, RJD उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार

बिहार MLC चुनाव, नामांकन का आज आखिरी दिन:पवन सिंह, निशांत कुमार सहित सभी कैंडिडेट करेंगे नामांकन, RJD उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों (एक सीट पर उपचुनाव) पर होने वाले चुनाव को लेकर आज नामांकन की अंतिम तारीख है। सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार सुबह 10 बजे के बाद बिहार विधानसभा परिसर पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपना नॉमिनेशन देंगे। एनडीए की दोनों प्रमुख पार्टियों बीजेपी और जदयू ने अपने-अपने 4 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान का शुक्रवार को किया था। बीजेपी ने भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव को खासा चर्चित बना दिया है। इसके अलावा वर्तमान विधान पार्षद डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित पर भी पार्टी ने भरोसा जताया है। सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश में बीजेपी ने 2 अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दो सवर्ण चेहरों को मौका दिया है। वहीं, जदयू ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद से खाली हुए स्थान पर ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की सूची में नीतीश के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, भारती मंडल और शिवरानी देवी को भी जगह मिली है। इनमें निशांत कुमार पटना, भारती मंडल मधुबनी और शिवरानी देवी पश्चिमी चंपारण से आती हैं। जदयू ने अपने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया है, जिसमें एक ओबीसी और तीन ईबीसी चेहरों को टिकट दिया गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। अशरफ अंसारी के मैदान में आने से चुनावी समीकरणों में एक नया आयाम जुड़ गया है। सबसे ज्यादा चर्चा में पवन सिंह इस चुनाव में सबसे चर्चित चेहरा बीजेपी उम्मीदवार पवन सिंह हैं। लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर उनकी सक्रिय राजनीति में एंट्री ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। नामांकन के दिन भी उनकी मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहने वाली है। RJD में उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस बरकरार महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी RJD ने अब तक अपने उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। हालांकि पार्टी के भीतर पूर्व विधान पार्षद सुनील सिंह का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो लालू प्रसाद यादव के सिंगापुर दौरे के बाद उनकी बेटी रोहिणी आचार्या का नाम भी चर्चा में आया था। ऐसे में तेजस्वी यादव के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों तरह की चुनौतियां हैं। यदि रोहिणी आचार्या को मौका मिलता है तो विपक्ष परिवारवाद के मुद्दे को लेकर आरजेडी पर हमलावर हो सकता है। दूसरी ओर बिस्कोमान चुनाव में हार के बाद सुनील सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में उन्हें विधान परिषद भेजना पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा सकता है। सिर्फ एक सीट जीत सकता है विपक्ष विधान परिषद चुनाव की संख्या बल की गणित विपक्ष के लिए आसान नहीं दिख रही है। एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। आरजेडी के पास अपने 25 विधायक हैं। ऐसे में उसे कांग्रेस, AIMIM और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी। मौजूदा परिस्थितियों में विपक्षी खेमे से केवल एक उम्मीदवार के जीतने की संभावना जताई जा रही है। उपेंद्र कुशवाहा पर टिकी निगाहें एनडीए की लिस्ट सामने आने के बाद अब राजनीतिक गलियारों की नजरें राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर टिक गई हैं। चर्चा है कि अगर उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद नहीं भेजा जाता है, तो भविष्य में उनके मंत्री पद पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। अगर कुशवाहा अपने बेटे को नौवें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। ऐसी स्थिति में दूसरी वरीयता के वोटों का महत्व काफी बढ़ जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसी परिस्थिति में जोड़-तोड़, क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चाएं भी तेज हो सकती हैं, जिसका फायदा विपक्षी उम्मीदवार को मिल सकता है। 18 जून को हो सकती है वोटिंग नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक रहती है तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। फिलहाल बिहार की राजनीति की निगाहें आज के नामांकन और आरजेडी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों (एक सीट पर उपचुनाव) पर होने वाले चुनाव को लेकर आज नामांकन की अंतिम तारीख है। सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार सुबह 10 बजे के बाद बिहार विधानसभा परिसर पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपना नॉमिनेशन देंगे। एनडीए की दोनों प्रमुख पार्टियों बीजेपी और जदयू ने अपने-अपने 4 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान का शुक्रवार को किया था। बीजेपी ने भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव को खासा चर्चित बना दिया है। इसके अलावा वर्तमान विधान पार्षद डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित पर भी पार्टी ने भरोसा जताया है। सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश में बीजेपी ने 2 अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और दो सवर्ण चेहरों को मौका दिया है। वहीं, जदयू ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद से खाली हुए स्थान पर ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की सूची में नीतीश के बेटे और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, भारती मंडल और शिवरानी देवी को भी जगह मिली है। इनमें निशांत कुमार पटना, भारती मंडल मधुबनी और शिवरानी देवी पश्चिमी चंपारण से आती हैं। जदयू ने अपने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया है, जिसमें एक ओबीसी और तीन ईबीसी चेहरों को टिकट दिया गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। अशरफ अंसारी के मैदान में आने से चुनावी समीकरणों में एक नया आयाम जुड़ गया है। सबसे ज्यादा चर्चा में पवन सिंह इस चुनाव में सबसे चर्चित चेहरा बीजेपी उम्मीदवार पवन सिंह हैं। लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर उनकी सक्रिय राजनीति में एंट्री ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। नामांकन के दिन भी उनकी मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहने वाली है। RJD में उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस बरकरार महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी RJD ने अब तक अपने उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। हालांकि पार्टी के भीतर पूर्व विधान पार्षद सुनील सिंह का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो लालू प्रसाद यादव के सिंगापुर दौरे के बाद उनकी बेटी रोहिणी आचार्या का नाम भी चर्चा में आया था। ऐसे में तेजस्वी यादव के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों तरह की चुनौतियां हैं। यदि रोहिणी आचार्या को मौका मिलता है तो विपक्ष परिवारवाद के मुद्दे को लेकर आरजेडी पर हमलावर हो सकता है। दूसरी ओर बिस्कोमान चुनाव में हार के बाद सुनील सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में उन्हें विधान परिषद भेजना पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा सकता है। सिर्फ एक सीट जीत सकता है विपक्ष विधान परिषद चुनाव की संख्या बल की गणित विपक्ष के लिए आसान नहीं दिख रही है। एक उम्मीदवार की जीत के लिए करीब 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। आरजेडी के पास अपने 25 विधायक हैं। ऐसे में उसे कांग्रेस, AIMIM और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी। मौजूदा परिस्थितियों में विपक्षी खेमे से केवल एक उम्मीदवार के जीतने की संभावना जताई जा रही है। उपेंद्र कुशवाहा पर टिकी निगाहें एनडीए की लिस्ट सामने आने के बाद अब राजनीतिक गलियारों की नजरें राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर टिक गई हैं। चर्चा है कि अगर उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद नहीं भेजा जाता है, तो भविष्य में उनके मंत्री पद पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। अगर कुशवाहा अपने बेटे को नौवें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। ऐसी स्थिति में दूसरी वरीयता के वोटों का महत्व काफी बढ़ जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसी परिस्थिति में जोड़-तोड़, क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चाएं भी तेज हो सकती हैं, जिसका फायदा विपक्षी उम्मीदवार को मिल सकता है। 18 जून को हो सकती है वोटिंग नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक रहती है तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। फिलहाल बिहार की राजनीति की निगाहें आज के नामांकन और आरजेडी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।  

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