लोकगीतों की प्रस्तुति में बच्चों की कला निखरी:राजकीय बालगृह में लोकगायन कार्यशाला में निदेशक ने की सराहना

लोकगीतों की प्रस्तुति में बच्चों की कला निखरी:राजकीय बालगृह में लोकगायन कार्यशाला में निदेशक ने की सराहना

राजकीय बाल गृह शिशु खुल्दाबाद प्रयागराज में लोकगायन प्रशिक्षण कार्यशाला का चौथा दिन बच्चों के लिए उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी रहा।
चार दिनों के प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने जो कुछ सीखा उसकी प्रस्तुति देखने एवं सुनने के लिए उत्तर प्रदेश एवं लोक जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ के निदेशक अतुल द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
यह 11 दिवसीय कार्यशाला उत्तर प्रदेश एवं लोक जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ के सहयोग से आयोजित की जा रही है। निदेशक ने बच्चों का हौसला बढ़ाया निदेशक अतुल द्विवेदी ने बच्चों की सीखने की लगन, उत्साह एवं प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों में कला और संस्कृति के प्रति विशेष रुचि दिखाई दे रही है। उनकी सीखने की ललक को देखते हुए उन्होंने भविष्य में बाल गृह के बच्चों के लिए नृत्य एवं पेंटिंग कार्यशालाओं के आयोजन हेतु अपनी संस्तुति प्रदान की। निदेशक द्वारा दो अतिरिक्त कार्यशालाओं की सहमति दिए जाने पर बाल कल्याण समिति, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्कृति निदेशालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के अमित श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। महिला शरणालय की अधीक्षिका मिथलेश पाल एवं बाल शिशु गृह की अधीक्षिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों को भारतीय संस्कृति, संस्कार से रुबरू कराया कार्यशाला में संगीत प्रशिक्षक सूरज प्रकाश के निर्देशन में राहुल सिंह ने हारमोनियम तथा अक्षत ने ढोलक का प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षकों ने बच्चों को विभिन्न लोकगीतों, संस्कार गीतों तथा पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का अभ्यास कराया। कार्यक्रम का संचालन अंकुर श्रीवास्तव ने किया। प्रशिक्षक सूरज प्रकाश ने बताया कि 11 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना, लोक परंपराओं की जानकारी देना तथा गायन-वादन की विभिन्न शैलियों से परिचित कराना है। चौथे दिन बच्चों ने कजरी, राम-विवाह गीत तथा मिथिला क्षेत्र की विभिन्न लोक विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में बच्चों के बढ़ते उत्साह, सक्रिय सहभागिता और सीखने की अभिरुचि ने उपस्थित अतिथियों एवं प्रशिक्षकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

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