मुक्त विवि में सात करोड़ का घोटाला, जांच शुरू:सीबीआई को भेजी शिकायत यूपी सरकार तक पहुंची, डीएम ने जांच बैठाई

मुक्त विवि में सात करोड़ का घोटाला, जांच शुरू:सीबीआई को भेजी शिकायत यूपी सरकार तक पहुंची, डीएम ने जांच बैठाई

प्रयागराज के उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का एक घोटाला सामने आया है। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। इससे इविवि से जुड़े संस्थानों में हड़कंप मचा है। हालांकि यह शिकायत सीबीआई तक पहुंचाई गई लेकिन सीबीआई ने राज्य सरकार को पूरा मामला ट्रांसफर कर दिया। अब यूपी सरकार के निर्देश पर जांच शुरू हुई है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में सत्र 2015-16 से 2019-20 के दौरान प्रवेश प्रक्रिया एवं परीक्षा संचालन के नाम पर सात करोड़ रुपये से अधिक की घपलेबाजी के आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत सभी एजेंसियों तक की गई तो खलबली मच गई। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के आधार पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू की है। सीबीआई को भेजी शिकायत मामले की शिकायत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) नई दिल्ली को भेजी गई। जहां से शिकायती पत्र को उत्तर प्रदेश शासन को भेज दिया गया। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन ने भी विश्वविद्यालय में लगाए गए आरोपों की जांच कराने के निर्देश जारी किए। शासन स्तर से विश्वविद्यालय प्रशासन से विस्तृत आख्या मांगी गई है। क्या है मामला जानिये कौशाम्बी जनपद के कड़ा अलीपुरजीता निवासी शिकायतकर्ता आनंद कुमार की ओर से सीबीआई को भेजे गए शिकायत पत्र 8 अक्तूबर 2025 में आरोप लगाया है कि वर्ष 2015 से 2019 के बीच ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क प्राप्त किए जाने के बावजूद कुछ धनराशि विश्वविद्यालय के खातों में जमा नहीं हुई।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस कारण विश्वविद्यालय को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हुई। आरोपों में तत्कालीन प्रवेश प्रभारी एवं वर्तमान परीक्षा नियंत्रक डॉ. जीके द्विवेदी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों का नाम भी शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि विश्वविद्यालय में बैंकों के माध्यम से प्राप्त प्रवेश शुल्क की राशि और वास्तविक प्रवेश संख्या के आधार पर प्राप्त होने वाली राशि के बीच उल्लेखनीय अंतर पाया गया है।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार यह अंतर ₹7,37,30,757 (सात करोड़ सैंतीस लाख तीस हजार सात सौ सत्तावन रुपये) बताया गया है। शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू व्यवस्था का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।
शिकायतकर्ता ने सीबीआई को भेजा शिकायतकर्ता ने मामले की जांच सीबीआई अथवा आर्थिक अपराध शाखा से कराने तथा कथित रूप से अर्जित संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की है। सीबीआई ने मामले की जांच के लिए मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को 31 अक्तूबर 2025 को लिखा था। इसके चलते संयुक्त सचिव उत्तर प्रदेश शासन शकील अहमद सिद्दीकी ने 27 अप्रैल 2026 को जिलाधिकारी प्रयागराज को पत्र लिखकर जांच का आदेश दिया। जिस पर जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दिया है। इस प्रकारण पर डॉ. जीके द्विवेदी ने कहा कि उन्हें इस जांच की अब तक कोई जानकारी नहीं है।

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