कैमूर के पहाड़ी क्षेत्रों में भीषण गर्मी के कारण भू-गर्भ जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अनुसार, जिले के कई इलाकों में जलस्तर लगभग तीन फुट नीचे चला गया है, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है। विभाग ने बताया कि पहले भी जलस्तर छह से आठ फुट तक खिसका था। हाल ही में हुई बारिश के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है, और कई गांवों में चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है। जल संकट को देखते हुए पीएचईडी विभाग ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत का अभियान चलाया है। जिले में कुल 2191 खराब चापाकलों में से 1483 को पाइप जोड़कर या अन्य मरम्मत कर फिर से चालू कर दिया गया है। शेष चापाकलों को भी जल्द ठीक करने का लक्ष्य है। लोगों को पानी के लिए दूर जाना पड़ रहा अधौरा प्रखंड के कई गांवों में अभी भी पेयजल संकट बना हुआ है, जहां लोगों को पानी के लिए दूर तक जाना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए पीएचईडी प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति कर रहा है। विभाग के अभियंताओं की टीम जलस्तर की निगरानी और चापाकलों की मरम्मत में लगातार जुटी है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जहां भी पानी की अधिक किल्लत होगी, वहां टैंकरों की संख्या बढ़ाकर लोगों को राहत पहुंचाई जाएगी। कैमूर के पहाड़ी क्षेत्रों में भीषण गर्मी के कारण भू-गर्भ जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अनुसार, जिले के कई इलाकों में जलस्तर लगभग तीन फुट नीचे चला गया है, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है। विभाग ने बताया कि पहले भी जलस्तर छह से आठ फुट तक खिसका था। हाल ही में हुई बारिश के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है, और कई गांवों में चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है। जल संकट को देखते हुए पीएचईडी विभाग ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत का अभियान चलाया है। जिले में कुल 2191 खराब चापाकलों में से 1483 को पाइप जोड़कर या अन्य मरम्मत कर फिर से चालू कर दिया गया है। शेष चापाकलों को भी जल्द ठीक करने का लक्ष्य है। लोगों को पानी के लिए दूर जाना पड़ रहा अधौरा प्रखंड के कई गांवों में अभी भी पेयजल संकट बना हुआ है, जहां लोगों को पानी के लिए दूर तक जाना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए पीएचईडी प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति कर रहा है। विभाग के अभियंताओं की टीम जलस्तर की निगरानी और चापाकलों की मरम्मत में लगातार जुटी है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जहां भी पानी की अधिक किल्लत होगी, वहां टैंकरों की संख्या बढ़ाकर लोगों को राहत पहुंचाई जाएगी।


