KGMU में फेफड़ों की जांच की नई तकनीक शुरू:लंग्स की गांठों की होगी सटीक पहचान, यूपी में पहली बार हाईटेक जांच का आगाज

KGMU में फेफड़ों की जांच की नई तकनीक शुरू:लंग्स की गांठों की होगी सटीक पहचान, यूपी में पहली बार हाईटेक जांच का आगाज

KGMU के चेस्ट मेडिसिन विभाग ने इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने अत्याधुनिक सी-आर्म गाइडेड रेडियल एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड तकनीक से फेफड़ों की जटिल बीमारियों की सटीक जांच शुरू की है। विभाग के डॉक्टरों की माने तो यूपी का यह पहला विभाग है जहां पर ये हाई टेक जांच सुविधा शुरू हुई है। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि यह उपलब्धि केवल नई तकनीक की शुरुआत नहीं। बल्कि टीमवर्क, समर्पण और बेहतर मरीज सेवाओं की दिशा में विभाग के मजबूत संकल्प का प्रतीक है। इससे KGMU में फेफड़ों के रोगों का उपचार सटीक और आसान होगा। इससे सटीक होगी घावों की पहचान व बायोप्सी डॉ.दर्शन बजाज ने बताया कि यह तकनीक फेफड़ों के अंदर मौजूद छोटी और गहराई में स्थित गांठों और संदिग्ध घावों की पहचान और बायोप्सी को अधिक सटीक बताने में सक्षम है। इससे मरीजों को समय पर सही निदान मिलने के साथ उपचार की दिशा तय करने में भी मदद मिलेगी। डॉ. दर्शन बजाज ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं। इसके लिए सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। भविष्य में सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए थायरॉयड शील्ड और विशेष हेडगियर की अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल की जाएंगी।

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