गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त पाई गई है। होमगार्ड और अग्निशमन सेवा के डीएसपी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अस्पताल के सभी फायर सेफ्टी सिस्टम निष्क्रिय मिले, जिसके बाद अस्पताल को सील करने की चेतावनी दी गई है। मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलर्ट रहने के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। गोपालगंज के इस मॉडल अस्पताल में सुरक्षा इंतजाम भगवान भरोसे चल रहे थे। निरीक्षण के दौरान, डीएसपी ने जब अस्पताल के सुरक्षा उपकरणों की जांच की, तो स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। ‘मॉडल अस्पताल’ का टैग होने के बावजूद, यहाँ सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई थी। स्प्रिंकलर सिस्टम पूरी तरह से ठप अस्पताल परिसर में रखे गए अग्निशामक सिलेंडरों में से एक भी काम करने की स्थिति में नहीं था। आग लगने पर स्वतः पानी की बौछार करने वाला स्प्रिंकलर सिस्टम पूरी तरह से ठप पड़ा था। इसके अतिरिक्त, आपातकाल में लोगों को सतर्क करने वाला फायर डिटेक्शन अलार्म और फायर वार्निंग स्विच भी निष्क्रिय पाए गए। इस संबंध में डीएसपी विकास कुमार ने बताया, “हम सोच रहे थे कि यह एक ‘मॉडल अस्पताल’ है, तो यहाँ व्यवस्थाएं सबसे बेहतरीन और दुरुस्त होंगी। लेकिन यहां का हाल इसके बिल्कुल विपरीत है। आपातकालीन सुरक्षा का एक भी उपकरण काम नहीं कर रहा है।” इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, जांच टीम ने मौके पर ही एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। फायर फाइटिंग सिस्टम चालू नहीं होने पर होगी कार्रवाई प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को सभी खामियों को दुरुस्त करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय के भीतर सभी फायर फाइटिंग सिस्टम को चालू नहीं किया गया, तो अस्पताल को सील करने सहित आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त पाई गई है। होमगार्ड और अग्निशमन सेवा के डीएसपी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अस्पताल के सभी फायर सेफ्टी सिस्टम निष्क्रिय मिले, जिसके बाद अस्पताल को सील करने की चेतावनी दी गई है। मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलर्ट रहने के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। गोपालगंज के इस मॉडल अस्पताल में सुरक्षा इंतजाम भगवान भरोसे चल रहे थे। निरीक्षण के दौरान, डीएसपी ने जब अस्पताल के सुरक्षा उपकरणों की जांच की, तो स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। ‘मॉडल अस्पताल’ का टैग होने के बावजूद, यहाँ सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई थी। स्प्रिंकलर सिस्टम पूरी तरह से ठप अस्पताल परिसर में रखे गए अग्निशामक सिलेंडरों में से एक भी काम करने की स्थिति में नहीं था। आग लगने पर स्वतः पानी की बौछार करने वाला स्प्रिंकलर सिस्टम पूरी तरह से ठप पड़ा था। इसके अतिरिक्त, आपातकाल में लोगों को सतर्क करने वाला फायर डिटेक्शन अलार्म और फायर वार्निंग स्विच भी निष्क्रिय पाए गए। इस संबंध में डीएसपी विकास कुमार ने बताया, “हम सोच रहे थे कि यह एक ‘मॉडल अस्पताल’ है, तो यहाँ व्यवस्थाएं सबसे बेहतरीन और दुरुस्त होंगी। लेकिन यहां का हाल इसके बिल्कुल विपरीत है। आपातकालीन सुरक्षा का एक भी उपकरण काम नहीं कर रहा है।” इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए, जांच टीम ने मौके पर ही एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। फायर फाइटिंग सिस्टम चालू नहीं होने पर होगी कार्रवाई प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को सभी खामियों को दुरुस्त करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय के भीतर सभी फायर फाइटिंग सिस्टम को चालू नहीं किया गया, तो अस्पताल को सील करने सहित आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।


