मेरठ के कुख्यात अपराधी और नौचंदी थाने के हिस्ट्रीशीटर अमित चौधरी उर्फ अमित मिरिंडा को बेंगलुरु हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और कारोबारी के अपहरण की धमकी देने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। बेंगलुरु स्थित कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रचैया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं। पीठ ने यह भी माना कि उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना न्यायहित में नहीं होगा। अदालत ने आशंका जताई कि आरोपी के रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित करने या जांच को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला पिछले साल 8 जुलाई का है, जब बेंगलुरु के एक कारोबारी के पिता को व्हाट्सएप कॉल कर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया और रकम नहीं देने पर कारोबारी के अपहरण की धमकी दी थी। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अमित मिरिंडा रंगदारी की पूरी साजिश में शामिल था। अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि वह यूपी का मोस्ट वांटेड अपराधी है और उसके खिलाफ कई राज्यों में गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अमित मिरिंडा के खिलाफ यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, रंगदारी, अपहरण, अवैध हथियारों की तस्करी, गैंगस्टर एक्ट, हनी ट्रैप, सामूहिक दुष्कर्म, पुलिस मुठभेड़, वाहन चोरी और लूट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। वह मेरठ के नौचंदी थाने का हिस्ट्रीशीटर बदमाश है और मेडिकल थाना क्षेत्र में सक्रिय डी-155 गैंग का सरगना भी बताया जाता है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चार्जशीट में मौजूद साक्ष्य, आरोपों की प्रकृति और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती। इसी के साथ अदालत ने अमित चौधरी उर्फ मिरिंडा की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उसे जेल में ही रहना होगा।


