दरभंगा एम्स परिसर के आसपास की खिरोई, बागमती और अन्य नदियों की गाद निकालने पर 309 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे इन नदियों का जलस्तर सुधरेगा। वहां बाढ़ से राहत मिलेगी। इससे निकलने वाली मिट्टी और गाद का इस्तेमाल एम्स की जमीन को भरने में किया जाएगा। जल संसाधन विभाग को मानसून के दौरान भी काम जारी रखने के लिए कहा गया है, ताकि केंद्र और राज्य की इस परियोजना में और देरी न हो। दरभंगा एम्स की जमीन पर मिट्टी भराई के लिए 18 अप्रैल 2023 की कैबिनेट बैठक में 309.29 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी, जिसका काम बीएमएसआईसीएल को करना था। लेकिन, 22 मई 2026 को भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर आयोजित बैठक में आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों ने एक नया तकनीकी फॉर्मूला पेश किया। इसके तहत तय हुआ कि जिस मुख्य भाग में भवनों का निर्माण होना है, वहां पूर्व की मिट्टी का स्तर वापस प्राप्त किया जाए और शेष भाग में आंशिक मिट्टी भराई हो। इस जटिल तकनीकी कार्य और मानसून के दौरान काम करने के व्यापक अनुभव को देखते हुए संसाधन विभाग को नोडल एजेंसी बनाने का निर्णय लिया गया। जल संसाधन विभाग ने एम्स परिसर की मिट्टी भराई और समतलीकरण के लिए 184.65 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार किया है। यह पूरी राशि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, जो पूर्व से स्वीकृत 309.29 करोड़ के बजट के दायरे में ही होगी। इस योजना के तहत एम्स परिसर के 25 किलोमीटर की परिधि में आने वाली खिरोई और बागमती जैसी प्रमुख नदियों से सिल्ट निकाली जाएगी। इस फैसले से राज्य सरकार को दोहरा लाभ मिलेगा; एक तरफ नदियों से गाद हटने से उनकी जलधारण क्षमता बढ़ेगी और मिथिलांचल को बाढ़ से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ एम्स जैसी भारी भरकम इमारत के लिए नीचे एक बेहद मजबूत और गुणवत्तायुक्त बेस तैयार हो सकेगा। दरभंगा एम्स परिसर के आसपास की खिरोई, बागमती और अन्य नदियों की गाद निकालने पर 309 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे इन नदियों का जलस्तर सुधरेगा। वहां बाढ़ से राहत मिलेगी। इससे निकलने वाली मिट्टी और गाद का इस्तेमाल एम्स की जमीन को भरने में किया जाएगा। जल संसाधन विभाग को मानसून के दौरान भी काम जारी रखने के लिए कहा गया है, ताकि केंद्र और राज्य की इस परियोजना में और देरी न हो। दरभंगा एम्स की जमीन पर मिट्टी भराई के लिए 18 अप्रैल 2023 की कैबिनेट बैठक में 309.29 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी, जिसका काम बीएमएसआईसीएल को करना था। लेकिन, 22 मई 2026 को भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर आयोजित बैठक में आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों ने एक नया तकनीकी फॉर्मूला पेश किया। इसके तहत तय हुआ कि जिस मुख्य भाग में भवनों का निर्माण होना है, वहां पूर्व की मिट्टी का स्तर वापस प्राप्त किया जाए और शेष भाग में आंशिक मिट्टी भराई हो। इस जटिल तकनीकी कार्य और मानसून के दौरान काम करने के व्यापक अनुभव को देखते हुए संसाधन विभाग को नोडल एजेंसी बनाने का निर्णय लिया गया। जल संसाधन विभाग ने एम्स परिसर की मिट्टी भराई और समतलीकरण के लिए 184.65 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार किया है। यह पूरी राशि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, जो पूर्व से स्वीकृत 309.29 करोड़ के बजट के दायरे में ही होगी। इस योजना के तहत एम्स परिसर के 25 किलोमीटर की परिधि में आने वाली खिरोई और बागमती जैसी प्रमुख नदियों से सिल्ट निकाली जाएगी। इस फैसले से राज्य सरकार को दोहरा लाभ मिलेगा; एक तरफ नदियों से गाद हटने से उनकी जलधारण क्षमता बढ़ेगी और मिथिलांचल को बाढ़ से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ एम्स जैसी भारी भरकम इमारत के लिए नीचे एक बेहद मजबूत और गुणवत्तायुक्त बेस तैयार हो सकेगा।


