गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड की अति नक्सल प्रभावित छछन्दो पंचायत अंतर्गत पारसनाथ पहाड़ की तलहटी में स्थित तिरिलटांड़ गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। लगभग 32 परिवारों और 300 की आबादी वाले इस गांव में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस गांव के अधिकांश लोग मधुबन क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं। हालांकि, रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में युवा पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल की सबसे गंभीर समस्या है। करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता है महिलाओं और युवतियों को घने जंगल के बीच लगभग एक किलोमीटर नीचे उतरकर चुआं (प्राकृतिक जलस्रोत) से पानी लाना पड़ता है। इसके बाद सिर पर पानी ढोकर करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव का एकमात्र हैंडपंप पिछले एक वर्ष से खराब पड़ा है। मजबूरी में लोग गांव के पास स्थित डाड़ी (तालाब) का गंदा पानी छानकर पी रहे हैं। इसी जल स्रोत का उपयोग स्नान और घरेलू कार्यों के लिए भी किया जाता है। बरसात में नाले का पानी मिलने और आसपास जंगली चूहों के बिल होने से जलस्रोत और अधिक प्रदूषित हो जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। पथरीले और पहाड़ी रास्ते से होकर जाना पड़ता है सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है। गांव तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की अधूरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। चार किलोमीटर सड़क का कालीकरण प्रस्तावित था, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी डेढ़ किलोमीटर पथरीले और पहाड़ी रास्ते से होकर जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, रात में किसी महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसे खाट पर उठाकर करीब एक किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, जहां से एंबुलेंस के माध्यम से 20 किलोमीटर दूर डुमरी या गिरिडीह अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीण मोहन टुडू ने बताया कि गांव में तीन स्थानों पर जलमीनार और पानी की टंकी का निर्माण कराया गया है, लेकिन करीब तीन वर्षों से योजना शुरू नहीं हो सकी है। जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई
वहीं, नारायण महतो ने आरोप लगाया कि मिनी जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। न सोलर प्लेट लगाया गया, न मोटर स्थापित हुई और न ही घरों तक नल कनेक्शन पहुंचा। गांव के मांझी हड़ाम कारू मुर्मू ने बताया कि गांव की बदहाल स्थिति का असर वैवाहिक रिश्तों पर भी पड़ रहा है। सड़क, पानी और अन्य सुविधाओं के अभाव को देखकर कई परिवार अपनी बेटियों का रिश्ता करने से इनकार कर देते हैं। ग्रामीण मोहन सोरेन ने बताया कि इसी कारण उनका तय विवाह भी टूट गया था। कृषि के लिए चेक डैम निर्माण की मांग
ग्रामीण चुपा हांसदा, राजेश हेम्ब्रम, रूपा हांसदा, रस्मी देवी, सुनिया देवी, सोमरा टुडू और कारू मुर्मू समेत अन्य लोगों ने भी गांव में स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा कृषि के लिए चेक डैम निर्माण की मांग की है। छछन्दो पंचायत की मुखिया रूपानी देवी ने बताया कि मनरेगा के तहत गांव में मिट्टी-मोरम सड़क, तालाब और पुलिया का निर्माण कराया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए नापी भी हुई थी, लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ सका। इस संबंध में उपायुक्त को लिखित आवेदन दिया गया है। वहीं, उपायुक्त रामनिवास यादव ने बताया कि गांव का निरीक्षण किया गया है। यहां सड़क और पेयजल की समस्या है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध फंड से सड़क निर्माण कराने की दिशा में पहल की जाएगी तथा अन्य समस्याओं का भी शीघ्र समाधान किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार जल्द पहल नहीं करती है तो तिरिलटांड़ के लोगों को आने वाले समय में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड की अति नक्सल प्रभावित छछन्दो पंचायत अंतर्गत पारसनाथ पहाड़ की तलहटी में स्थित तिरिलटांड़ गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। लगभग 32 परिवारों और 300 की आबादी वाले इस गांव में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस गांव के अधिकांश लोग मधुबन क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं। हालांकि, रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में युवा पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल की सबसे गंभीर समस्या है। करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता है महिलाओं और युवतियों को घने जंगल के बीच लगभग एक किलोमीटर नीचे उतरकर चुआं (प्राकृतिक जलस्रोत) से पानी लाना पड़ता है। इसके बाद सिर पर पानी ढोकर करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव का एकमात्र हैंडपंप पिछले एक वर्ष से खराब पड़ा है। मजबूरी में लोग गांव के पास स्थित डाड़ी (तालाब) का गंदा पानी छानकर पी रहे हैं। इसी जल स्रोत का उपयोग स्नान और घरेलू कार्यों के लिए भी किया जाता है। बरसात में नाले का पानी मिलने और आसपास जंगली चूहों के बिल होने से जलस्रोत और अधिक प्रदूषित हो जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। पथरीले और पहाड़ी रास्ते से होकर जाना पड़ता है सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है। गांव तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की अधूरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। चार किलोमीटर सड़क का कालीकरण प्रस्तावित था, लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी डेढ़ किलोमीटर पथरीले और पहाड़ी रास्ते से होकर जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, रात में किसी महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसे खाट पर उठाकर करीब एक किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है, जहां से एंबुलेंस के माध्यम से 20 किलोमीटर दूर डुमरी या गिरिडीह अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीण मोहन टुडू ने बताया कि गांव में तीन स्थानों पर जलमीनार और पानी की टंकी का निर्माण कराया गया है, लेकिन करीब तीन वर्षों से योजना शुरू नहीं हो सकी है। जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई
वहीं, नारायण महतो ने आरोप लगाया कि मिनी जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। न सोलर प्लेट लगाया गया, न मोटर स्थापित हुई और न ही घरों तक नल कनेक्शन पहुंचा। गांव के मांझी हड़ाम कारू मुर्मू ने बताया कि गांव की बदहाल स्थिति का असर वैवाहिक रिश्तों पर भी पड़ रहा है। सड़क, पानी और अन्य सुविधाओं के अभाव को देखकर कई परिवार अपनी बेटियों का रिश्ता करने से इनकार कर देते हैं। ग्रामीण मोहन सोरेन ने बताया कि इसी कारण उनका तय विवाह भी टूट गया था। कृषि के लिए चेक डैम निर्माण की मांग
ग्रामीण चुपा हांसदा, राजेश हेम्ब्रम, रूपा हांसदा, रस्मी देवी, सुनिया देवी, सोमरा टुडू और कारू मुर्मू समेत अन्य लोगों ने भी गांव में स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा कृषि के लिए चेक डैम निर्माण की मांग की है। छछन्दो पंचायत की मुखिया रूपानी देवी ने बताया कि मनरेगा के तहत गांव में मिट्टी-मोरम सड़क, तालाब और पुलिया का निर्माण कराया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए नापी भी हुई थी, लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ सका। इस संबंध में उपायुक्त को लिखित आवेदन दिया गया है। वहीं, उपायुक्त रामनिवास यादव ने बताया कि गांव का निरीक्षण किया गया है। यहां सड़क और पेयजल की समस्या है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध फंड से सड़क निर्माण कराने की दिशा में पहल की जाएगी तथा अन्य समस्याओं का भी शीघ्र समाधान किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार जल्द पहल नहीं करती है तो तिरिलटांड़ के लोगों को आने वाले समय में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।


