खान सर के हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं:15 दिन में सुधार नहीं तो होगा सील, आग लगी तो खाक हो जाएंगे पटना के 78 हॉस्पिटल

खान सर के हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं:15 दिन में सुधार नहीं तो होगा सील, आग लगी तो खाक हो जाएंगे पटना के 78 हॉस्पिटल

आग लगने से दिल्ली के होटल में 22 और मुजफ्फरपुर के हॉस्पिटल में 6 लोगों की मौत हुई। इसके बाद बिहार में फायर ब्रिगेड विभाग अलर्ट पर है। पटना में होटल और अस्पतालों की जांच की जा रही है। पटना के 462 निजी अस्पतालों में से 78 अग्निशामन मानकों का पालन नहीं कर रहे। इनमें खान सर का खान हेल्थ केयर हॉस्पिटल भी शामिल है। दो सीढ़ियां होनी चाहिए, लेकिन एक है। पर्याप्त स्प्रिंकलर नहीं हैं। फायर फ्लोर प्लान भी लगाने को कहा गया है। 15 दिन में सुधार नहीं हुआ तो हॉस्पिटल सील होगा। भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए, पटना के अस्पतालों में आग से बचाव के क्या इंतजाम हैं? आग लगने पर काम नहीं करती लिफ्ट अग्निशमन अनुमंडल पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार ने बताया कि ऑडिट के दौरान खान सर के अस्पताल में गड़बड़ियां पाई गई हैं। G+ 5 फ्लोर में दो सीढ़ियां होनी चाहिए, लेकिन एक ही सीढ़ी है। इसके अलावा स्प्रिंकलर पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। फायर फ्लोर प्लान भी लगाने के लिए कहा गया है। इंद्रजीत ने कहा, ‘ऊंचे भवनों व अस्पतालों में दो सीढ़ियों की जरूरत पड़ती है। यह कहकर नहीं बचा जा सकता कि एक सीढ़ी के अलावा लिफ्ट है। आग लगने पर लिफ्ट काम नहीं आता। मेटल आग लगने पर फैलता है। इसलिए लिफ्ट फंस सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘खान हेल्थ केयर को फायर फ्लोर प्लान लगाने के लिए कहा गया है। हर फ्लोर पर मैप लगाकर बताया जाता है कि उसे देखने वाला व्यक्ति कहां है। नजदीकी निकास मार्ग कहां है। आग लगने पर कहां से आसानी ने निकल सकते हैं।’ इंद्रजीत ने बताया कि स्प्रिंकलर का काम आग लगने की स्थिति में खुद चालू होकर पानी गिराना है ताकि आग बुझ जाए। इसके लिए हर स्प्रिंकलर हेड में कांच की नली लगाई जाती है। इसमें ग्लिसरीन तरल भरा होता है। आग लगने पर उसकी गर्मी से यह तरल फैलता है और कांच का बल्ब टूट जाता है। इससे स्प्रिंकलर का वाल्व खुल जाता है और पानी का छिड़काव खुद ब खुद शुरू हो जाता है। अब जानिए, पटना के दूसरे अस्पतालों का क्या हाल है होटल मे-फेयर: पटना के फ्रेजर रोड स्थित होटल मे-फेयर में स्प्रिंकर एक ही फ्लोर पर पाया गया। टंकी की क्षमता भी कम है। उसे बढ़ाने के लिए कहा गया है। आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए बनी सीढ़ी काफी संकरी है। उसे भी ठीक करने की चेतावनी दी गई है। समाधान हॉस्पिटल: पाटलिपुत्रा के समाधान हॉस्पिटल में फायर डोर लगाने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि पंप हाउस लगाएं। पुरानी बिल्डिंग में ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर नहीं है। इसे भी लगाने को कहा गया है। PMCH: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में आग लगने पर मरीजों को बाहर निकालने की व्यवस्था में बाधाएं हैं। पुराने इमरजेंसी में प्रवेश और निकास का रास्ता तंग हो गया है। यहां वाहनों की पार्किंग की जाती है। इस अस्पताल में बीते दो महीने में आग लगने की तीन घटनाएं हुई हैं। यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी हर वक्त मौजूद रहती है। NMCH: नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH) में आग लगने पर मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकालने के लिए चार निकास द्वार बनाए गए हैं। सभी वार्डों में फायर सेफ्टी पाइप लगे हैं। जिस जगह पाइप नहीं है वहां फायर एक्सटिंग्विशर रखा गया है। IGIMS: इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS) की इमरजेंसी, OPD और सभी वार्ड में आग से बचाव के इंतजाम हैं। स्मोक सेंसर लगाए गए हैं। सभी भवनों में दो से तीन जगहों से इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था है। LNJP: लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल (LNJP) की पुरानी बिल्डिंग में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। मरीजों के बाहर निकलने का एक ही रास्ता है। यहां बने ट्रामा सेंटर में फायर सेफ्टी के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। न्यू गार्डिनर अस्पताल: इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित न्यू गार्डिनर अस्पताल में फायर सेफ्टी से जुड़े उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन इनका रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है। आपात स्थिति में मरीजों के बाहर निकलने के इंतजाम हैं। महावीर वात्सल्य अस्पताल: यहां आपात स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों के बाहर निकलने के लिए दो सीढ़ियां हैं। फायर स्प्रिंकलर, इमरजेंसी अलार्म बटन समेत दूसरे इंतजाम हैं। फायर सेफ्टी की कमी से रडार पर हैं ये हॉस्पिटल 7 दिन तक चलेगा फायर सेफ्टी का महाअभियान पटना में फायर सेफ्टी का महाअभियान 7 दिनों तक चलाया जाएगा। 4 जून को 34 होटलों और 37 अस्पतालों में जांच की गई। नए संस्थानों को सुधार के लिए 7 दिन का समय दिया गया। नोटिस के बावजूद सुधार नहीं किए जाने पर सील करने की कार्रवाई की जाएगी। 241 हाेटलों में से 161 में फायर सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं पटना में 241 हाेटलाें में से 161 में फायर सेफ्टी मानकाें का पालन नहीं हाे रहा है। 2024 में पटना जंक्शन के पास स्थित पाल हाेटल और अमृत लॉज में भीषण अगलगी में 8 लाेगाें की माैत के बाद अग्निशमन विभाग ने राजधानी के हाेटलाें और रेस्टाेरेंटाें का फायर ऑडिट किया। पिछले साल भी फायर ऑडिट हुआ। पता चला कि पटना के 80 फीसदी हाेटलाें में इंट्री-एग्जिट गेट एक ही है। 10 फीट के राेड पर बने हैं। 3-4 फीट चाैड़ी सीढ़ी है। फायर विभाग ने इन 161 हाेटलाें काे जल्द से जल्द फायर फाइटिंग के सभी उपकरण लगाने काे कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें सील कर दिया जाएगा। आग लगने की घटना रोकने के लिए क्या करें? बिजली विभाग के पूर्व निदेशक हरेराम पांडेय ने कहा कि अस्पतालों में एयर कंडीशन की वजह से आग लगने की शिकायत आ रही है। इसलिए एरिया वाइज सही कैपिसिटी का एसी लगाना चाहिए। एसी का तार सही कैपिसिटी का होना चाहिए। ऐसे FR तार लगाने चाहिए, जिसमें आग लगने पर बिजली कट जाती है। वायरिंग, फ्यूज और एमसीवी सही रेटिंग का होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एसी 24 डिग्री पर चलाना चाहिए, यही सरकार का गाइड लाइन भी है। एनर्जी सेव करने वाले एसी का इस्तेमाल करना चाहिए। ICU में अगर 4 एसी लगे हों और उसमें से 1 काम नहीं कर रहा तो 3 एसी पर लोड बढ़ जाता है। इससे हादसा हो सकता है। आग लगने से दिल्ली के होटल में 22 और मुजफ्फरपुर के हॉस्पिटल में 6 लोगों की मौत हुई। इसके बाद बिहार में फायर ब्रिगेड विभाग अलर्ट पर है। पटना में होटल और अस्पतालों की जांच की जा रही है। पटना के 462 निजी अस्पतालों में से 78 अग्निशामन मानकों का पालन नहीं कर रहे। इनमें खान सर का खान हेल्थ केयर हॉस्पिटल भी शामिल है। दो सीढ़ियां होनी चाहिए, लेकिन एक है। पर्याप्त स्प्रिंकलर नहीं हैं। फायर फ्लोर प्लान भी लगाने को कहा गया है। 15 दिन में सुधार नहीं हुआ तो हॉस्पिटल सील होगा। भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए, पटना के अस्पतालों में आग से बचाव के क्या इंतजाम हैं? आग लगने पर काम नहीं करती लिफ्ट अग्निशमन अनुमंडल पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार ने बताया कि ऑडिट के दौरान खान सर के अस्पताल में गड़बड़ियां पाई गई हैं। G+ 5 फ्लोर में दो सीढ़ियां होनी चाहिए, लेकिन एक ही सीढ़ी है। इसके अलावा स्प्रिंकलर पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। फायर फ्लोर प्लान भी लगाने के लिए कहा गया है। इंद्रजीत ने कहा, ‘ऊंचे भवनों व अस्पतालों में दो सीढ़ियों की जरूरत पड़ती है। यह कहकर नहीं बचा जा सकता कि एक सीढ़ी के अलावा लिफ्ट है। आग लगने पर लिफ्ट काम नहीं आता। मेटल आग लगने पर फैलता है। इसलिए लिफ्ट फंस सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘खान हेल्थ केयर को फायर फ्लोर प्लान लगाने के लिए कहा गया है। हर फ्लोर पर मैप लगाकर बताया जाता है कि उसे देखने वाला व्यक्ति कहां है। नजदीकी निकास मार्ग कहां है। आग लगने पर कहां से आसानी ने निकल सकते हैं।’ इंद्रजीत ने बताया कि स्प्रिंकलर का काम आग लगने की स्थिति में खुद चालू होकर पानी गिराना है ताकि आग बुझ जाए। इसके लिए हर स्प्रिंकलर हेड में कांच की नली लगाई जाती है। इसमें ग्लिसरीन तरल भरा होता है। आग लगने पर उसकी गर्मी से यह तरल फैलता है और कांच का बल्ब टूट जाता है। इससे स्प्रिंकलर का वाल्व खुल जाता है और पानी का छिड़काव खुद ब खुद शुरू हो जाता है। अब जानिए, पटना के दूसरे अस्पतालों का क्या हाल है होटल मे-फेयर: पटना के फ्रेजर रोड स्थित होटल मे-फेयर में स्प्रिंकर एक ही फ्लोर पर पाया गया। टंकी की क्षमता भी कम है। उसे बढ़ाने के लिए कहा गया है। आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए बनी सीढ़ी काफी संकरी है। उसे भी ठीक करने की चेतावनी दी गई है। समाधान हॉस्पिटल: पाटलिपुत्रा के समाधान हॉस्पिटल में फायर डोर लगाने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि पंप हाउस लगाएं। पुरानी बिल्डिंग में ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर नहीं है। इसे भी लगाने को कहा गया है। PMCH: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में आग लगने पर मरीजों को बाहर निकालने की व्यवस्था में बाधाएं हैं। पुराने इमरजेंसी में प्रवेश और निकास का रास्ता तंग हो गया है। यहां वाहनों की पार्किंग की जाती है। इस अस्पताल में बीते दो महीने में आग लगने की तीन घटनाएं हुई हैं। यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी हर वक्त मौजूद रहती है। NMCH: नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH) में आग लगने पर मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकालने के लिए चार निकास द्वार बनाए गए हैं। सभी वार्डों में फायर सेफ्टी पाइप लगे हैं। जिस जगह पाइप नहीं है वहां फायर एक्सटिंग्विशर रखा गया है। IGIMS: इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS) की इमरजेंसी, OPD और सभी वार्ड में आग से बचाव के इंतजाम हैं। स्मोक सेंसर लगाए गए हैं। सभी भवनों में दो से तीन जगहों से इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था है। LNJP: लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल (LNJP) की पुरानी बिल्डिंग में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। मरीजों के बाहर निकलने का एक ही रास्ता है। यहां बने ट्रामा सेंटर में फायर सेफ्टी के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। न्यू गार्डिनर अस्पताल: इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित न्यू गार्डिनर अस्पताल में फायर सेफ्टी से जुड़े उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन इनका रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है। आपात स्थिति में मरीजों के बाहर निकलने के इंतजाम हैं। महावीर वात्सल्य अस्पताल: यहां आपात स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों के बाहर निकलने के लिए दो सीढ़ियां हैं। फायर स्प्रिंकलर, इमरजेंसी अलार्म बटन समेत दूसरे इंतजाम हैं। फायर सेफ्टी की कमी से रडार पर हैं ये हॉस्पिटल 7 दिन तक चलेगा फायर सेफ्टी का महाअभियान पटना में फायर सेफ्टी का महाअभियान 7 दिनों तक चलाया जाएगा। 4 जून को 34 होटलों और 37 अस्पतालों में जांच की गई। नए संस्थानों को सुधार के लिए 7 दिन का समय दिया गया। नोटिस के बावजूद सुधार नहीं किए जाने पर सील करने की कार्रवाई की जाएगी। 241 हाेटलों में से 161 में फायर सेफ्टी के मानकों का पालन नहीं पटना में 241 हाेटलाें में से 161 में फायर सेफ्टी मानकाें का पालन नहीं हाे रहा है। 2024 में पटना जंक्शन के पास स्थित पाल हाेटल और अमृत लॉज में भीषण अगलगी में 8 लाेगाें की माैत के बाद अग्निशमन विभाग ने राजधानी के हाेटलाें और रेस्टाेरेंटाें का फायर ऑडिट किया। पिछले साल भी फायर ऑडिट हुआ। पता चला कि पटना के 80 फीसदी हाेटलाें में इंट्री-एग्जिट गेट एक ही है। 10 फीट के राेड पर बने हैं। 3-4 फीट चाैड़ी सीढ़ी है। फायर विभाग ने इन 161 हाेटलाें काे जल्द से जल्द फायर फाइटिंग के सभी उपकरण लगाने काे कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें सील कर दिया जाएगा। आग लगने की घटना रोकने के लिए क्या करें? बिजली विभाग के पूर्व निदेशक हरेराम पांडेय ने कहा कि अस्पतालों में एयर कंडीशन की वजह से आग लगने की शिकायत आ रही है। इसलिए एरिया वाइज सही कैपिसिटी का एसी लगाना चाहिए। एसी का तार सही कैपिसिटी का होना चाहिए। ऐसे FR तार लगाने चाहिए, जिसमें आग लगने पर बिजली कट जाती है। वायरिंग, फ्यूज और एमसीवी सही रेटिंग का होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एसी 24 डिग्री पर चलाना चाहिए, यही सरकार का गाइड लाइन भी है। एनर्जी सेव करने वाले एसी का इस्तेमाल करना चाहिए। ICU में अगर 4 एसी लगे हों और उसमें से 1 काम नहीं कर रहा तो 3 एसी पर लोड बढ़ जाता है। इससे हादसा हो सकता है।  

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