आरंग में शुक्रवार को नगर पालिका परिषद की सामान्य सभा की बैठक हुई, जो हंगामे के कारण काफी चर्चा में रही। यह बैठक ‘विश्व पर्यावरण दिवस 2026’ के विशेष अभियान पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी, लेकिन जल्द ही यह आरंग बस स्टैंड निर्माण के मुद्दे पर बहस का केंद्र बन गई। बैठक के दौरान माहौल इतना गर्म हो गया कि सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षद एक साथ आ गए और इस मुद्दे पर एकजुट होकर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन से सवाल करने लगे। स्थिति ऐसी रही कि भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना के पार्षदों ने मिलकर अध्यक्ष को घेर लिया। लगातार उठते सवालों के बीच अध्यक्ष कई मुद्दों पर जवाब नहीं दे पाए और बैठक में अकेले पड़ते नजर आए। अपनों ने ही घेरा, अकेले पड़े अध्यक्ष इस बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन को विपक्ष से ज्यादा अपनी ही पार्टी (भाजपा) के पार्षदों के विरोध का सामना करना पड़ा। लंबे समय से उनकी कार्यप्रणाली और व्यवहार को लेकर भाजपा पार्षदों में नाराजगी चल रही थी, जो इस बैठक में खुलकर सामने आ गई। नाराज पार्षदों ने अध्यक्ष का साथ देने के बजाय विपक्ष के साथ मिलकर सवाल उठाए। बैठक के दौरान भ्रष्टाचार और ‘लेती-देती’ जैसे गंभीर आरोपों पर पार्षदों ने सीधे सवाल किए, लेकिन अध्यक्ष ने बार-बार यही कहा कि विषय से हटकर बात न करें और गरिमा बनाए रखें, लेकिन उनकी बात का पार्षदों पर कोई खास असर नहीं हुआ। विवाद की जड़: ₹6.69 करोड़ का अटका हुआ बस स्टैंड प्रोजेक्ट इस पूरे विवाद की असली वजह आरंग बस स्टैंड का ₹6.69 करोड़ का कायाकल्प प्रोजेक्ट है। छत्तीसगढ़ में सत्ता बदलने के बाद जब आरंग नगर पालिका में भाजपा की परिषद बनी, तब भाजपा और शिवसेना के पार्षदों की सहमति से बस स्टैंड को ‘बैहार’ इलाके में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था। उस समय कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया था। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट में बड़ा पेंच सामने आ गया है। जिस बैहार जगह पर बस स्टैंड शिफ्ट करने की योजना थी, वह सरकारी रिकॉर्ड में ‘शामिलात चारागाह’ यानी सामुदायिक चरागाह की जमीन है। नियमों के मुताबिक, जब तक शासन स्तर पर इसका भूमि उपयोग (मद परिवर्तन) नहीं होता, तब तक वहां निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। इसी कानूनी अड़चन और राजनीतिक खींचतान के चलते पिछले दो साल से यह मामला अटका हुआ है और आम लोग परेशान हैं। अब जब जनता में नाराजगी बढ़ी, तो भाजपा और शिवसेना के पार्षद भी पीछे हट गए हैं और मांग कर रहे हैं कि बस स्टैंड को पुरानी जगह पर ही रखा जाए और जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाए। कांग्रेस के आरोप और 10 दिन का अल्टीमेटम बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिना काम शुरू हुए ही ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जो गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में ठेकेदार को फायदा पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष शरद गुप्ता ने कहा कि अगर अगले 10 दिनों के भीतर बस स्टैंड का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वे सड़क पर उतरेंगे और नगर पालिका का घेराव करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। विकास पर भारी पड़ रही राजनीति आरंग का बस स्टैंड सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लिए भी बहुत जरूरी जगह है। यहां व्यावसायिक परिसर बनने से लोगों को रोजगार मिलता और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलतीं। लेकिन यह अहम प्रोजेक्ट अब राजनीति और प्रशासनिक देरी की वजह से अटक गया है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। बैठक में यह भी देखने को मिला कि नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन के खिलाफ उनकी ही पार्टी के पार्षद खड़े हो गए, जिससे अंदरूनी मतभेद साफ नजर आए। अगर अगले 10 दिनों में इस मामले का समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में आरंग नगर पालिका में और ज्यादा विवाद और हंगामे की स्थिति बन सकती है।


