बिहार सरकार ने एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों (पीएलएचआईवी) में सक्रिय टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए भभुआ जिले में एक विशेष अभियान शुरू किया है। यह अभियान अगले तीन महीने तक मिशन मोड में पूरे जिले में सक्रिय रहेगा। विभाग ने स्वास्थ्य पदाधिकारियों को कैंप लगाकर हर एचआईवी संक्रमित की अनिवार्य टीबी जांच करने का निर्देश दिया है। सरकार जांच से लेकर इलाज और दवाइयों का पूरा खर्च खुद वहन करेगी। इस अभियान के तहत सभी एआरटी सेंटर और आईसीटीसी संस्थानों में आने वाले प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति की नियमित स्क्रीनिंग की जाएगी। इस दौरान मरीजों के वजन में कमी, रात में पसीना आना, भूख न लगना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लक्षण मिलने पर डॉक्टरों की सलाह पर चेस्ट एक्स-रे, सीबीनेट, ट्रूनेट और बलगम की जांच पूरी तरह निःशुल्क की जाएगी। जिला टीबी केंद्र और एआरटी सेंटर के बीच मजबूत समन्वय से टू-वे स्क्रीनिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है। इसके तहत एचआईवी संक्रमितों की टीबी जांच और टीबी रोगियों की अनिवार्य एचआईवी जांच की जाएगी। एआरटी सेंटर में पंजीकृत सभी जीवित व्यक्तियों का हर महीने टीबी स्क्रीनिंग रिकॉर्ड भी संधारित किया जाएगा, ताकि समय पर इलाज सुनिश्चित कर लोगों की जान बचाई जा सके। बिहार सरकार ने एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों (पीएलएचआईवी) में सक्रिय टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए भभुआ जिले में एक विशेष अभियान शुरू किया है। यह अभियान अगले तीन महीने तक मिशन मोड में पूरे जिले में सक्रिय रहेगा। विभाग ने स्वास्थ्य पदाधिकारियों को कैंप लगाकर हर एचआईवी संक्रमित की अनिवार्य टीबी जांच करने का निर्देश दिया है। सरकार जांच से लेकर इलाज और दवाइयों का पूरा खर्च खुद वहन करेगी। इस अभियान के तहत सभी एआरटी सेंटर और आईसीटीसी संस्थानों में आने वाले प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति की नियमित स्क्रीनिंग की जाएगी। इस दौरान मरीजों के वजन में कमी, रात में पसीना आना, भूख न लगना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लक्षण मिलने पर डॉक्टरों की सलाह पर चेस्ट एक्स-रे, सीबीनेट, ट्रूनेट और बलगम की जांच पूरी तरह निःशुल्क की जाएगी। जिला टीबी केंद्र और एआरटी सेंटर के बीच मजबूत समन्वय से टू-वे स्क्रीनिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है। इसके तहत एचआईवी संक्रमितों की टीबी जांच और टीबी रोगियों की अनिवार्य एचआईवी जांच की जाएगी। एआरटी सेंटर में पंजीकृत सभी जीवित व्यक्तियों का हर महीने टीबी स्क्रीनिंग रिकॉर्ड भी संधारित किया जाएगा, ताकि समय पर इलाज सुनिश्चित कर लोगों की जान बचाई जा सके।


