Diabetes And Anemia: डायबिटीज मरीजों में खून की कमी एक आम समस्या, जानें इससे कौनसी दिक्कतें हो सकती हैं

Diabetes And Anemia: डायबिटीज मरीजों में खून की कमी एक आम समस्या, जानें इससे कौनसी दिक्कतें हो सकती हैं

Diabetes And Anemia Connection: अक्सर लोग मानते हैं कि डायबिटीज का मतलब सिर्फ ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में एनीमिया (Anemia) आम लोगों की तुलना में बहुत ज्यादा होता है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर गिरने लगता है, तो डायबिटीज और भी गंभीर हो सकती है। आइए जानते हैं कि डायबिटीज और एनीमिया का क्या संबंध है और डायबिटीज वाले लोगों में एनीमिया होने के कारण क्या-क्या हैं?

डायबिटीज और एनीमिया का संबंध

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, विश्व में एनीमिया के 50% मामले आयरन की कमी के कारण होते हैं। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में एनीमिया यानी खून की कमी होना एक बेहद आम समस्या है। डायबिटीज की वजह से शरीर के अंदर तनाव और सूजन बनी रहती है। इसके कारण शरीर भोजन से मिलने वाले आयरन (Iron) को ठीक से सोख नहीं पाता है। जब शरीर को आयरन नहीं मिलता, तो हीमोग्लोबिन का स्तर अपने आप गिरने लगता है।

खून की कमी से डायबिटीज के मरीजों को क्या दिक्कत हो सकती है?

जर्नल ऑफ रिसर्च इन मेडिकल एंड डेंटल साइंस के अनुसार, अगर डायबिटीज के मरीज के शरीर में खून की कमी हो जाए, तो इसे माइक्रोवैस्कुलर कॉम्प्लीकेशन्स (Microvascular Complications) यानी छोटी नसों के खराब होने का एक बड़ा संकेत माना जाता है। इससे शरीर को ये बड़े नुकसान हो सकते हैं;

1. डायबिटिक रेटिनोपैथी- हमारी आंखों के पीछे मौजूद पर्दा (रेटिना) बेहद नाजुक नसों से जुड़ा होता है। रिसर्च बताती है कि जिन डायबिटीज मरीजों में खून की कमी होती है, उनकी आंखों की नसें बहुत जल्दी खराब होने लगती हैं। इससे धुंधला दिखने लगता है और गंभीर मामलों में रोशनी जाने का खतरा भी बढ़ जाता है।

2. किडनी का खराब होना- खून की कमी के कारण शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऑक्सीजन न मिलने से पहले से ही कमजोर किडनी डैमेज होने लगती है। हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर की कोशिकाओं को पूरी ऊर्जा नहीं मिलती, जिससे मरीज हर वक्त बेहद थका हुआ, कमजोर और सुस्त महसूस करता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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