विश्व-पर्यावरण दिवस पर बेतिया व्यवहार-न्यायालय परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित:कैंपस को हरा-भरा बनाने का लोगों ने लिया संक्लप, जज ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक

विश्व-पर्यावरण दिवस पर बेतिया व्यवहार-न्यायालय परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित:कैंपस को हरा-भरा बनाने का लोगों ने लिया संक्लप, जज ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर में एक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाने के साथ हुई। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने परिसर को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया, साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी मिलेगी जब हम साल भर पेड़-पौधों का रोपण और उनकी देखभाल करेंगे। मानव जीवन के लिए आवश्यक है पेड़ उन्होंने अपने संबोधन में पेड़ों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पेड़ न केवल शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच अधिक से अधिक वृक्षारोपण समय की मांग है। जिला जज ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और सक्रिय रहने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। लोगों से मिट्टी के कुल्हड़ का उपयोग करने की अपील इसे कम करने के लिए दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि चाय और अन्य पेय पदार्थों के लिए प्लास्टिक के कपों के बजाय मिट्टी के कुल्हड़ या पुनः उपयोग किए जा सकने वाले कपों का प्रयोग किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में, सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और हरित भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर में एक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाने के साथ हुई। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने परिसर को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया, साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी. ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी मिलेगी जब हम साल भर पेड़-पौधों का रोपण और उनकी देखभाल करेंगे। मानव जीवन के लिए आवश्यक है पेड़ उन्होंने अपने संबोधन में पेड़ों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पेड़ न केवल शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच अधिक से अधिक वृक्षारोपण समय की मांग है। जिला जज ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और सक्रिय रहने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। लोगों से मिट्टी के कुल्हड़ का उपयोग करने की अपील इसे कम करने के लिए दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि चाय और अन्य पेय पदार्थों के लिए प्लास्टिक के कपों के बजाय मिट्टी के कुल्हड़ या पुनः उपयोग किए जा सकने वाले कपों का प्रयोग किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में, सभी न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और हरित भविष्य के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था।  

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