वाराणसी जिला जेल में फर्जी रिपोर्ट बनाने के केस में सजा काट रहे डॉक्टर के.के जैन की तबियत गुरुवार रात बिगड़ गई। प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. के.के. जैन की तबीयत बिगड़ने पर उपचार के लिए बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनका इलाज हृदय रोग विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। पुलिस हिरासत में मौत के चर्चित मामले में सजा काट रहे डॉक्टर पिछले दो दिन से बीमार थे और मानसिक तौर पर परेशान भी हैं। जेल प्रशासन के अनुसार दोपहर में डॉ. जैन ने खाना खाने से इनकार किया, इस दौरान जेल की बैरक में सीने में दर्द की शिकायत की। उनकी हालत को देखते हुए जेल प्रशासन ने तत्काल उन्हें मंडलीय अस्पताल भेजा। प्राथमिक उपचार के बाद जांच की गई और चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर मानते हुए बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। बीएचयू पहुंचने के बाद उन्हें हृदय रोग विभाग में भर्ती किया गया। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। डॉ. जैन पहले से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्हें प्रोस्टेट संबंधी बीमारी है और हृदय की समस्या के चलते पहले से स्टेंट भी लगाया जा चुका है।
29 साल पुराने मामले में सुनाई गई है सजा कोर्ट ने 29 साल पुराने मामले में डॉ. केके जैन को पांच वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। आरोपी रिटायर्ड दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह को 10 वर्ष के कारावास और 31 हजार रुपये जुर्माना, जबकि दूसरे रिटायर्ड दरोगा राधेश्याम सिंह को छह माह के कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जंसा थाना क्षेत्र के बखरिया गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद सिंह 5 फरवरी 1997 को अपने बेटे की दवा लेने वाराणसी आए थे। इसी दौरान महानगर बस में सीट को लेकर उनकी एक यात्री से कहासुनी हो गई। आरोप है कि सुंदरपुर पुलिस चौकी पर तैनात तत्कालीन दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह ने राजेंद्र को पकड़कर चौकी ले गए और उन पर यात्री दयाराम की जेब से 100 रुपये चोरी करने का आरोप लगाया।परिजनों और जांच एजेंसियों के अनुसार पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के चलते उसी दिन शाम को राजेंद्र प्रसाद सिंह की मौत हो गई। पुलिस ने सुसाइड दिखाने की कोशिश की इसके बाद पुलिस ने मामले को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। तत्कालीन दरोगा नरेंद्र प्रताप सिंह ने मृतक के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कराया और विवेचना राधेश्याम सिंह को सौंपी गई। विवेचना में मौत को आत्महत्या बताया गया। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. केके जैन ने अपनी रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फंदा लगने से दम घुटना बताया था। हालांकि बाद की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट में गले पर मिले निशानों की माप, शरीर के अंगों की स्थिति तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया था। सीबीसीआईडी जांच में यह भी सामने आया कि जिस शॉल से आत्महत्या किए जाने का दावा किया गया था, वह बरामद नहीं हुआ। वहीं बैरक में पंखा होने के भी प्रमाण नहीं मिले।


