फरीदाबाद में कली नोटों के मामले में राजस्थान पुलिस ने ब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। राजस्थान के दौसा सदर थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि जांच के दौरान कुलदीप गुर्जर का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। उसकी तलाश में राजस्थान पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। 80 नकली नोट के साथ गिरफ्तार किया था आरोपी दरअसल, इस पूरे मामले का खुलासा दौसा जिले में नकली नोटों के साथ आयुष मीणा की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। पुलिस ने उसके पास से 500-500 रुपये के 80 नकली नोट बरामद किए थे, जिनकी कुल कीमत 40 हजार रुपए थी। पूछताछ में आयुष ने बताया कि उसने 17 हजार रुपए की असली रकम देकर 40 हजार रुपए के नकली नोट खरीदे थे और उन्हें बाजार में चलाने की तैयारी कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह नकली नोटों को बाजार में खपाने के लिए छोटे बच्चों का इस्तेमाल करता था ताकि किसी को शक न हो। एक आरोपी को फरीदाबाद से पकड़ा आयुष से मिली जानकारी के आधार पर राजस्थान पुलिस हरियाणा के फरीदाबाद पहुंची। 31 मई को पुलिस ने बसंतपुर इलाके में छापेमारी कर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के तारापुर गांव निवासी संतोष को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक अर्टिगा कार, 3 प्रिंटर और कुछ संदिग्ध नकली नोट बरामद किए गए। पुलिस को आशंका है कि इन प्रिंटरों का इस्तेमाल नकली नोट छापने के लिए किया जा रहा था। बरामद सामान को कब्जे में लेकर सील कर दिया गया। मामले की जांच कर रही पुलिस गिरफ्तार संतोष को भी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं आयुष मीणा को भी जेल भेज दिया गया है। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। फिलहाल राजस्थान पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं और मामले की गहन जांच जारी है।


