सीहोर शहर के 100 से अधिक ऐतिहासिक कुएं और बावडि़यां गंदगी, मिट्टी और काई से पटी पड़ी हैं, जिससे उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ये जल स्रोत कभी पूरे शहर की प्यास बुझाते थे। बुजुर्गों के अनुसार, मंडी क्षेत्र में जब पार्वती नदी से पानी नहीं आता था, तब मोहल्ले वालों ने चंदा जुटाकर और रात-रात भर जागकर इन कुओं का निर्माण किया था। आज इन्हें कचरा डालने के लिए छोड़ दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन कुओं की सफाई और गहरीकरण किया जाए, तो इनमें साल भर पानी भरा रह सकता है। इससे आसपास के बोरिंग और हैंडपंप भी रिचार्ज हो जाएंगे, जो गर्मियों में जल संकट से निपटने में सहायक सिद्ध होंगे। मंडी क्षेत्र में लगभग 15 कुएं उपेक्षित हैं। फ्रीगंज में नेमी की दुकान के पास, गणेश मंदिर के सामने और अंदर स्थित तीन कुएं बदहाल स्थिति में हैं। इसी प्रकार, गल्ला मंडी की बावड़ी, वर्कशॉप रोड का जीन वाला कुआं और वर्कशॉप कॉलोनी के पीछे वाले कुएं भी गंदगी से भरे पड़े हैं। सरकार द्वारा नदियों, कुओं और बावड़ियों के संरक्षण के लिए मार्च माह से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का गहरीकरण, पुनर्जीवन और अतिक्रमण हटाना था। हालांकि, सीहोर में हकीकत इसके उलट है। सरकारी अमले ने न तो इन कुओं की सफाई में रुचि दिखाई और न ही इनके संरक्षण का कोई ठोस खाका तैयार किया। अभियान के बावजूद एक भी ऐतिहासिक कुएं का जीर्णोद्धार न होना प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है। प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में सीहोर जिला निचले पायदान पर है। इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ सुधीर सिंह ने बताया कि कुओं की सफाई के लिए टीम लगाई जाएगी।


