ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर के दौरान भी समय-समय पर हमले देखने को मिल रहे हैं। हालांकि इन हमलों का सीज़फायर पर कोई असर नहीं पड़ने वाला, लेकिन इस वजह से दोनों देशों के बीच होने वाली डील में समय लग रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही डील फाइनल हो सकती है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने उन रिपोर्ट्स से इनकार किया है जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान (Pakistan) के ज़रिए ईरान ने चेतावनी दी थी।
किस चेतावनी के बारे में रुबियो ने किया ज़िक्र?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए एक चेतावनी भेजी थी कि अगर अमेरिका से युद्ध और बढ़ा, तो ईरान परमाणु हथियार का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। हालांकि रुबियो ने इससे इनकार कर दिया है। उन्होंने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि ऐसा कोई संदेश ट्रंप प्रशासन तक पहुंचा था। रुबियो ने साफ कर दिया कि अगर ऐसा हुआ होता, तो उन्हें इसकी जानकारी ज़रूर होती।
ईरान के परमाणु प्रोग्राम के खिलाफ है अमेरिका
यह बात किसी से भी छिपी नहीं है कि अमेरिका ईरान के परमाणु प्रोग्राम के खिलाफ है। हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान का परमाणु प्रोग्राम 1950 के दशक में अमेरिका की मदद से ही शुरू हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति ड्वाइट आइज़नहावर के ‘Atoms for Peace’ कार्यक्रम के तहत 1957 में दोनों देशों ने परमाणु सहयोग समझौता किया। अमेरिका ने ईरान को रिसर्च रिएक्टर और तकनीकी सहायता दी थी।
1979 की ईरानी क्रांति के बाद सब बदल गया। अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बिगड़ गए। अमेरिका को डर था कि नया इस्लामी शासन परमाणु प्रोग्राम को शांतिपूर्ण ऊर्जा के बजाय हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। इसी वजह से 1980 के दशक से अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए जो अभी भी खत्म नहीं हुए हैं। IAEA की रिपोर्ट्स और अमेरिकी खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए हैं।
2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन सीमित किया और बदले में उसे प्रतिबंधों में राहत मिली। लेकिन 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से बाहर निकलकर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ अभियान शुरू किया और ईरान पर भारी प्रतिबंध लगाए। तब से अमेरिका का स्थायी रुख रहा है कि ईरान को कभी परमाणु हथियार बनाने नहीं दिया जाएगा, क्योंकि इससे इज़रायल और पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा को खतरा है। ईरान ने कई बार कहा है कि उसके परमाणु प्रोग्राम का लक्ष्य परमाणु ऊर्जा विकसित करना है, लेकिन अमेरिका का लक्ष्य ईरान के परमान्य प्रोग्राम को पूरी तरह से रोकना है।
ज़िंदा हैं मोजतबा खामेनेई
रुबियो ने इस बात की भी पुष्टि कर दी है कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ज़िंदा हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोजतबा अमेरिकी हमले में घायल हो गए थे, जिसकी पुष्टि ईरान ने भी की थी। हालांकि ईरान ने यह भी बताया कि मोजतबा स्वस्थ हैं और उनकी स्थिति में तेज़ी से सुधार हो रहा है।


