हरदा में 10 दिन से मूंग खरीदी पंजीयन ठप:पोर्टल की खराबी और गिरदावरी अपलोड न होने से 40 हजार किसान परेशान

हरदा में 10 दिन से मूंग खरीदी पंजीयन ठप:पोर्टल की खराबी और गिरदावरी अपलोड न होने से 40 हजार किसान परेशान

हरदा जिले में समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया पिछले 10 दिनों से बाधित है। पोर्टल में तकनीकी खराबी और गिरदावरी रिपोर्ट अपलोड न होने के कारण किसान अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे हैं। 25 मई से शुरू हुए इन पंजीयनों की अंतिम तारीख 15 जून निर्धारित की गई है। ऐसे में समय कम होने और बारिश का मौसम करीब आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में लगभग 40 हजार किसानों ने 1 लाख 45 हजार हेक्टेयर में मूंग की फसल बोई है। पंजीयन न होने से किसानों को अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें डर सता रहा है कि बारिश शुरू होने से पहले उनकी फसल सुरक्षित नहीं बिकी, तो खराब हो सकती है। कृषि विभाग के उप संचालक (डीडीए) जवाहरलाल कास्दे ने बताया, “पंजीयन चालू हैं और अब तक 800 से अधिक पंजीयन हो चुके हैं। हालांकि, पोर्टल में तकनीकी दिक्कत के कारण वे अभी दिखाई नहीं दे रहे हैं।” गिरदावरी चढ़वाने ऑनलाइन केंद्रों के चक्कर काट रहे किसान
ग्राम चारखेड़ा के किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि उनकी कृषि भूमि तीन तहसीलों में आती है। गिरदावरी रिपोर्ट अपलोड न होने के कारण उनके पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं। अपनी गिरदावरी चढ़वाने के लिए उन्हें हर दिन ऑनलाइन केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं, ग्राम अहलवाड़ा के किसान राजेश गुर्जर पिछले पांच दिनों से पंजीयन के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी सोसायटी पर उनका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। पटवारियों ने उन्हें जानकारी दी है कि गिरदावरी को पोर्टल पर चढ़ाने का काम अभी जारी है। सोडलपुर के किसान आदित्य पटेल ने भी साइट न चलने की वजह से पंजीयन न होने की समस्या बताई है। मसनगांव समिति में 700 में से सिर्फ 1 किसान का पंजीयन
तकनीकी खामियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मसनगांव समिति के 700 किसानों में से अब तक केवल ग्राम कमताड़ा के एक ही किसान का पंजीयन हो पाया है। किसानों का स्पष्ट आरोप है कि गिरदावरी के अभाव में पंजीयन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल नहीं सुधरा, तो अनेक किसान शासन की खरीदी व्यवस्था का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे। किसान लगातार समिति और राजस्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई दे रही है।

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