भास्कर संवाददाता| सलामतपुर/दीवानगंज सांची जनपद की ग्राम पंचायत अंबाडी से केमखेड़ी और घोड़ा चौक जाने वाले मार्ग को रेलवे विभाग द्वारा पूरी तरह बंद किए जाने से ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। रेलवे द्वारा अंडरपास क्षेत्र के आसपास बाउंड्रीवॉल निर्माण शुरू किए जाने से 8 से 10 गांवों के हजारों लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले रेलवे फाटक बंद किए जाने के बाद इसी अंडरपास को वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग किया जा रहा था। हालांकि बरसात में इसमें पानी भर जाता था, फिर भी लोग इसी रास्ते से आवाजाही करते थे। अब यदि अंडरपास भी बंद हो गया तो किसानों, विद्यार्थियों, मरीजों और ग्रामीणों के लिए दूसरी ओर पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ग्रामीणों ने दी चेतावनी अंबाडी के सरपंच प्रतिनिधि रमेश कुमार ने कहा कि पहले रेलवे फाटक बंद किया गया और अब अंडरपास क्षेत्र को भी बाउंड्रीवॉल से घेरा जा रहा है। इससे हजारों ग्रामीण प्रभावित होंगे। यदि प्रशासन और रेलवे विभाग ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो ग्रामीण चक्काजाम करेंगे और रेल यातायात रोककर विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ेगी परेशानी : यह मार्ग आसपास के कई गांवों के विद्यार्थियों के लिए स्कूल पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। छात्रा मानसी लोधी ने बताया कि वर्तमान में बच्चे अंडरपास के जरिए स्कूल आते-जाते हैं। यदि यह रास्ता बंद हो गया तो शिक्षा प्रभावित होगी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभियान चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों का रास्ता ही बंद किया जा रहा है। वहीं आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। सालों से उठ रही मांग, फिर भी नहीं मिला समाधान : ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सांची विधायक और रेलवे के डीआरएम को भी कई बार लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवाने का प्रयास किया, लेकिन ठेकेदार के कर्मचारियों ने काम जारी रखा। यह मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क से भी जुड़ा है। ऐसे में इसे बंद करना करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजना की उपयोगिता को प्रभावित करेगा। किसानों के सामने खड़ा हुआ खेती का संकट ग्रामीण पन्नालाल पटेल और महेंद्र पटेल ने बताया कि अनेक किसानों की जमीन रेलवे लाइन के दूसरी ओर है। धान की बुवाई का समय शुरू होने वाला है, लेकिन मार्ग बंद होने से ट्रैक्टर और कृषि उपकरण खेतों तक नहीं पहुंच पाएंगे। वर्तमान में भी बरसात के दौरान अंडरपास में चार माह तक पानी भरा रहता है, जिससे खाद और बीज मजदूरों के जरिए कंधों पर ढोकर ले जाने पड़ते हैं। इससे खेती की लागत भी बढ़ जाती है। यदि मार्ग पूरी तरह बंद हो गया तो कृषि कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।


