भोपाल के लिंक रोड नंबर-2 स्थित नगर निगम की बिल्डिंग के सेकंड फ्लोर पर एक महिला लिफ्ट में फंस गईं। करीब 20 मिनट तक महिला फंसी रही। जिसे निकालने में खासी मशक्कत करना पड़ी। लिफ्ट में ऑटो रेस्क्यू या बैकअप सिस्टम नहीं होने से स्थिति गंभीर हो गई। महिला जैसे ही लिफ्ट में घुसी, बिजली गुल हो गई थी। मामला बुधवार शाम का है। 6 मई को इस बिल्डिंग का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकार्पण किया था। 73 करोड़ रुपए की लागत से बनी बिल्डिंग में लिफ्ट लगाई गई है। महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुई थीं। इसी दौरान बिजली चली गई और लिफ्ट बीच रास्ते में अटक गई। कर्मचारी के फंसने की जानकारी मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। कुछ लोगों ने तकनीकी टीम के पहुंचने से पहले ही लिफ्ट का दरवाजा खोलने का प्रयास शुरू कर दिया। लोगों ने गेट खोलने की कोशिश की नगर निगम की बिजली शाखा के कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जब तकनीकी टीम मौके पर पहुंची, तब कुछ लोग चाबी और पेचकस की मदद से लिफ्ट का गेट खोलने का प्रयास कर रहे थे। टीम ने उन्हें रोका और लिफ्ट सिस्टम को रीसेट किया। इसके बाद लगभग 10 मिनट में महिला कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर आने के बाद वह काफी घबराई हुई दिखाई दीं। सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल अधिकारियों के मुताबिक लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, लेकिन बिजली बंद होने के कारण वह रुक गई थी। घटना के बाद करोड़ों रुपए की लागत से बने नए निगम मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों और नागरिकों का कहना है कि जब भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं, तो लिफ्ट में ऑटो बैकअप या ऑटो रेस्क्यू सिस्टम जैसी जरूरी सुविधाएं होना चाहिए थीं। जानिए, लिफ्ट बंद होने पर छेड़छाड़ क्यों खतरनाक है विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक लिफ्टों में सुरक्षा के कई स्वचालित सिस्टम लगे होते हैं। बिजली जाने या तकनीकी कारणों से रुकने पर लिफ्ट ऑटो मोड में जाकर रीसेट होती है और निकटतम सुरक्षित फ्लोर तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू करती है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति बाहर या अंदर से पेचकस, चाबी या अन्य उपकरणों से गेट खोलने की कोशिश करता है, तो सेफ्टी सिस्टम बाधित हो सकता है। इससे लिफ्ट वहीं जाम हो जाती है और यात्रियों को बाहर निकालने में अधिक समय लग सकता है। नई बिल्डिंग के लोकार्पण की देखिए तस्वीरें… एक जगह पर आ जाएंगे सभी विभाग बिल्डिंग की शुरुआत के बाद निगम के सभी विभाग एक ही बिल्डिंग में आ गए हैं। सेंट्रल वर्कशॉप, हाउसिंग फॉर ऑल, सिविल, जनसंपर्क, विद्युत, बीसीएलएल, जल कार्य, सीवेज, स्वच्छ भारत मिशन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, झील प्रकोष्ठ, एनयूएलएम, राजस्व, गोवर्धन परियोजना, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन शाखाएं एक ही जगह पर लगेगी। हालांकि, एक महीने में अधिकांश ऑफिस यहां नहीं आए हैं। ग्राउंड फ्लोर पर एंटर होते ही जनसुविधा केंद्र स्थापित किया गया है। जहां एक ही स्थान पर सभी विभागों से संबंधित जानकारी आवेदक को मिलेगी। बिल्डिंग परमिशन समेत कई जनसुविधा भी यहां मिलेंगी। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम के तत्कालीन कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय बिल्डिंग शुरू की जा रही है। किस फ्लोर पर क्या?


