बंगाल में एकनाथ शिंदे मॉडल अपनाया जा रहा है। तृणमूल विधायकों को डर है कि यदि वे सीधे तौर पर भाजपा में शामिल हो जाएं तो उनका मुस्लिम वोट बैंक उनसे छिन जाएगा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिले। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के नेता के तौर पर स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही राज्य की राजनीति गरमा गई। तृणमूल और भाजपा ने एक दूसरे पर वार-पलटवार किया।
भाजपा उसी खेल में उनसे आगे निकल रही : अधीर
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि तृणमूल नेता सीधे तौर पर डरकर भाजपा के सामने नतमस्तक हो रहे हैं। आज तृणमूल को जो चुने हुए जनप्रतिनिधि नया दल बनाने का प्रयास कर रहे हैं, उन सभी के खिलाफ कोई न कोई भ्रष्टाचार का आरोप है क्योंकि भाजपा के साथ ईडी, सीबीआई तो थी है, अब सीआईडी और बंगाल पुलिस भी है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि तृणमूल के विधायक केवल बचना चाहते हैं। ऐसा करने से इन विधायकों को बचने का एक जरिया मिल जाएगा और भाजपा को बड़े आराम से, बिना कोई रोक-टोक सदन में कुछ भी करने की आजादी मिल जाएगी। ममता बनर्जी खुद जिस खेल में माहिर थीं, अब वे देख रही हैं कि भाजपा उसी खेल में उनसे आगे निकल रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल में एकनाथ शिंदे मॉडल अपनाया जा रहा है। तृणमूल विधायकों को डर है कि यदि वे सीधे तौर पर भाजपा में शामिल हो जाएं तो उनका मुस्लिम वोट बैंक उनसे छिन जाएगा और भाजपा को लग रहा है कि इन लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करने से उनका वोट बैंक खराब होगा इसलिए दूर-दूर से ये सारा खेल खेला जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस का मतलब है ममता बनर्जी: सेन
तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा कि ऐसे बहुत सारे विधायक हैं जिनके हस्ताक्षर हमारे पास भी हैं और दूसरों के पास भी हैं। दो पत्र जमा किए गए हैं। पार्टी जो निर्णय लेगी वही होगा लेकिन सच बात यह है कि ऐसा करने वाले निर्दलीय विधायक नहीं थे। ये ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के विधायक थे। ये समस्या भाजपा के लिए है क्योंकि यह लोग जो दल बदल कर रहे हैं उसी क्षेत्र में भाजपा के विरोध में राजनीति करना शुरू कर सकते हैं। ममता बनर्जी ही असल तृणमूल कांग्रेस है। तृणमूल कांग्रेस सांसद डोला सेन ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस का मतलब है ममता बनर्जी और आम जनता है तो आम जनता भी तृणमूल कांग्रेस में है और ममता बनर्जी भी हैं।
भाजपा के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा: प्रसून
तृणमूल नेता प्रसून बनर्जी ने कहा कि भाजपा के खिलाफ हमारा राजनीतिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा। हमारी वैचारिक लड़ाई भी चलती रहेगी। इसके अलावा, सरकार के साथ हमारा सहयोग, एक जिम्मेदार विपक्ष के तौर पर, जहां भी ऐसे सहयोग की जरूरत होगी, भी जारी रहेगा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में, सत्ताधारी सरकार और विपक्ष दोनों का ही सदन में मौजूद रहना, आपस में बातचीत करना और रचनात्मक बहसों में हिस्सा लेना ज़रूरी होता है। इसलिए, विधानसभा के सभी विधायकों ने मिलकर यह कदम उठाने का फैसला किया।
तृणमूल की कोई नीति नहीं है: इंद्रनील
ऋतव्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता बनाने का समर्थन करने पर, भाजपा नेता इंद्रनील खान ने कहा, तृणमूल जब सत्ता में थी तब उन्होंने युवाओं से नौकरी चुराई, गरीबों से राशन चुराया। ये काफी समय से चल रहा था और अब जब उनकी सत्ता चली गई, जनता ने चोरों को हटा दिया, भय को हटाकर भरोसे को चुना तो अभिषेक बनर्जी ने अपने ही विधायकों से उनके हस्ताक्षर चुराने का काम शुरू कर दिया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने फाइलें चोरी कीं और चुनाव के बाद जब कुछ नहीं मिला तो अपने विधायकों से हस्ताक्षर चुरा लिए गए। अब उन्हीं के विधायक उनसे डर रहे हैं। तृणमूल की कोई नीति है नहीं। उनकी केवल एक ही नीति थी घोटालाबाजी करना। भाजपा नेता खगेन मुर्मू ने तृणमूल में अंदरूनी कलह पर कहा कि तृणमूल की जो स्थिति आज है, उनके जो भी विधायक हैं, उनकी संख्या भी घट रही है। तृणमूल के जो सांसद हैं उनकी संख्या भी कम हो रही है। तृणमूल का अर्थ कुछ भी नहीं रहेगा। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को छोड़कर कोई अन्य तृणमूल कांग्रेस में रहने वाला नहीं है। राज्य के मंत्री तापस रॉय ने कहा कि हमने जीवन में कभी नहीं सुना कि कोई पार्टी अपने विधायकों के हस्ताक्षर के साथ घोटाला कर रही हो।


