भागलपुर के अस्पताल मायागंज में अलीगंज निवासी सात महीने की गर्भवती रूपा देवी सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थीं। उसकी मां ने बताया कि इलाज के लिए उन्हें मायागंज अस्पताल लाया गया, जहां पंजीकरण और प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें तत्काल भर्ती कर उपचार शुरू नहीं किया गया। आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने पहले सदर अस्पताल से रेफर स्लिप लाने को कहा, जिसके कारण गंभीर स्थिति में घायल गर्भवती महिला को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। दर्द से कराह रही महिला को समय पर उपचार नहीं मिलने से परिजनों में नाराजगी देखी गई। बाद में उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष रंजन ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल इलाज शुरू कराया। समय रहते उपचार मिलने से महिला की स्थिति संभाली जा सकी। डॉक्टर बोले- मरीज को दौड़ाना गलत मामले पर सदर के डॉ. आशीष रंजन ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचते ही आवश्यक चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर मरीज, विशेषकर गर्भवती महिला को कागजी प्रक्रिया या रेफरल की औपचारिकताओं के नाम पर अस्पतालों के बीच नहीं दौड़ाया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में मरीज की जान और स्वास्थ्य सर्वोपरि होता है। प्राथमिकता तत्काल उपचार को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का पहला दायित्व मरीज को समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। भागलपुर के अस्पताल मायागंज में अलीगंज निवासी सात महीने की गर्भवती रूपा देवी सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थीं। उसकी मां ने बताया कि इलाज के लिए उन्हें मायागंज अस्पताल लाया गया, जहां पंजीकरण और प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें तत्काल भर्ती कर उपचार शुरू नहीं किया गया। आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने पहले सदर अस्पताल से रेफर स्लिप लाने को कहा, जिसके कारण गंभीर स्थिति में घायल गर्भवती महिला को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। दर्द से कराह रही महिला को समय पर उपचार नहीं मिलने से परिजनों में नाराजगी देखी गई। बाद में उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष रंजन ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल इलाज शुरू कराया। समय रहते उपचार मिलने से महिला की स्थिति संभाली जा सकी। डॉक्टर बोले- मरीज को दौड़ाना गलत मामले पर सदर के डॉ. आशीष रंजन ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचते ही आवश्यक चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर मरीज, विशेषकर गर्भवती महिला को कागजी प्रक्रिया या रेफरल की औपचारिकताओं के नाम पर अस्पतालों के बीच नहीं दौड़ाया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में मरीज की जान और स्वास्थ्य सर्वोपरि होता है। प्राथमिकता तत्काल उपचार को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का पहला दायित्व मरीज को समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।


