Glucose Vs ORS In Summer: जून का महीना शुरू होते ही लू का कहर बढ़ रहा है। ऐसे में धूप में निकल जाओ, तो शरीर का पानी सूखने लगता है। जिसके कारण सिर घूमने लगता है, चक्कर आने लगते हैं और कमजोरी महसूस होने लगती है। जब भी घर में किसी को ऐसी दिक्कत होती है, तो हम तुरंत या तो ग्लूकोज घोलकर दे देते हैं या फिर ओआरएस (ORS) का पैकेट ले आते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों का काम शरीर में बिल्कुल अलग-अलग होता है। आइए. फिजिशियन डॉक्टर विपुल अग्रवाल (MBBS, MD, FAGE, CPCDM, RSSDI, जयपुर) से समझते हैं कि तेज गर्मी और कमजोरी में आपके लिए क्या पीना ज्यादा सही है।
ग्लूकोज और ओआरएस में क्या अंतर होता है?
डॉ. अग्रवाल का कहना है, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ये दोनों चीजें अंदर जाकर हमारे शरीर में क्या काम करती हैं। ग्लूकोज का मतलब सीधा-सीधा शुगर यानी चीनी से होता है। जब आप ग्लूकोज पानी में घोलकर पीते हैं, तो यह आपके शरीर को तुरंत एनर्जी (ताकत) देता है।
दूसरी तरफ, ओआरएस जिसे हम ओरल रीहाइड्रेशन साल्ट भी कहते हैं, वह सिर्फ चीनी नहीं है। ओआरएस जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) का एक सही बैलेंस होता है।
कमजोरी या चक्कर आने पर क्या पीना चाहिए?
गर्मी में ओआरएस सही विकल्प है। तेज धूप में चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर अधिकतर लोग ग्लूकोज पी लेते हैं, लेकिन ये पूरा समाधान नहीं है। पसीने के साथ शरीर से नमक और जरूरी खनिज भी निकल जाते हैं, जिन्हें ग्लूकोज अकेला वापस नहीं कर सकता। ORS में पानी, नमक और शुगर तीनों का संतुलन होता है, इसलिए यह बेहतर विकल्प है। उल्टी या दस्त की स्थिति में तो ओआरएस (ORS) अनिवार्य है।
ओआरएस पीते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
बाजार में मिलने वाले ओआरएस के पैकेट को हमेशा सही तरीके से ही बनाना चाहिए। एक बड़े पैकेट को हमेशा एक लीटर साफ पानी में ही घोलना चाहिए। कुछ लोग स्वाद के चक्कर में आधे गिलास पानी में ही पूरा पैकेट डाल देते हैं, ऐसा करने से शरीर में नमक की मात्रा अचानक बढ़ सकती है जो नुकसानदेह है। इसके अलावा ओआरएस के घोल में कभी भी ऊपर से अलग से चीनी या नमक नहीं मिलाना चाहिए। अगर बाजार का ओआरएस नहीं है, तो आप घर में भी इसे तैयार कर सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


