चाईबासा में ग्रामीण के गले में फंसी जिंदा मछली:दांत से चबाने की कोशिश में हुआ हादसा, गले में अटकी; डॉक्टरों ने बचाई जान

चाईबासा में ग्रामीण के गले में फंसी जिंदा मछली:दांत से चबाने की कोशिश में हुआ हादसा, गले में अटकी; डॉक्टरों ने बचाई जान

पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र के बंजरा गांव में रविवार शाम एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। मछली पकड़ने गए एक ग्रामीण के गले में जिंदा मछली फंस गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंचने और डॉक्टरों की तत्परता से उसकी जान बचा ली गई। बंजरा गांव निवासी चंपई गगराई अपने तीन साथियों के साथ निश्चिंतपुर गांव के तालाब में मछली पकड़ने गया था। मछली पकड़ने के दौरान चंपई ने एक मछली को दांत से चबाकर मारने की कोशिश की। इसी दौरान मछली उसके हाथ से फिसलकर सीधे मुंह में चली गई और गले में फंस गई। ग्रामीण घबरा गए और तत्काल उसे अस्पताल ले गए मछली उस समय जिंदा थी, जिसके कारण वह गले के अंदर तड़पने लगी। घटना के बाद चंपई को तेज दर्द होने लगा और उसे सांस लेने तथा निगलने में गंभीर परेशानी हुई। स्थिति बिगड़ती देख उसके साथ मौजूद ग्रामीण घबरा गए और तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनुआ लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए सदर अस्पताल चाईबासा रेफर कर दिया। मछली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया
चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचने पर आपातकालीन विभाग की टीम ने बिना देर किए उपचार शुरू किया। डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी टीम ने आवश्यक जांच और चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद गले में फंसी पूरी मछली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। मछली बाहर निकलते ही मरीज को तत्काल राहत मिली और उसकी स्थिति में सुधार होने लगा। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, समय पर मरीज को अस्पताल लाना और त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप इस मामले में निर्णायक साबित हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसी स्थिति में देरी होने पर सांस लेने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती थी और मरीज की हालत और अधिक बिगड़ सकती थी। यह अजीबो-गरीब हादसा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि इस तरह के जोखिम भरे प्रयासों से बचना चाहिए। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र के बंजरा गांव में रविवार शाम एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। मछली पकड़ने गए एक ग्रामीण के गले में जिंदा मछली फंस गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंचने और डॉक्टरों की तत्परता से उसकी जान बचा ली गई। बंजरा गांव निवासी चंपई गगराई अपने तीन साथियों के साथ निश्चिंतपुर गांव के तालाब में मछली पकड़ने गया था। मछली पकड़ने के दौरान चंपई ने एक मछली को दांत से चबाकर मारने की कोशिश की। इसी दौरान मछली उसके हाथ से फिसलकर सीधे मुंह में चली गई और गले में फंस गई। ग्रामीण घबरा गए और तत्काल उसे अस्पताल ले गए मछली उस समय जिंदा थी, जिसके कारण वह गले के अंदर तड़पने लगी। घटना के बाद चंपई को तेज दर्द होने लगा और उसे सांस लेने तथा निगलने में गंभीर परेशानी हुई। स्थिति बिगड़ती देख उसके साथ मौजूद ग्रामीण घबरा गए और तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनुआ लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए सदर अस्पताल चाईबासा रेफर कर दिया। मछली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया
चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचने पर आपातकालीन विभाग की टीम ने बिना देर किए उपचार शुरू किया। डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी टीम ने आवश्यक जांच और चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद गले में फंसी पूरी मछली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। मछली बाहर निकलते ही मरीज को तत्काल राहत मिली और उसकी स्थिति में सुधार होने लगा। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, समय पर मरीज को अस्पताल लाना और त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप इस मामले में निर्णायक साबित हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसी स्थिति में देरी होने पर सांस लेने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती थी और मरीज की हालत और अधिक बिगड़ सकती थी। यह अजीबो-गरीब हादसा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि इस तरह के जोखिम भरे प्रयासों से बचना चाहिए।  

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