सहारनपुर में मां शाकंभरी देवी क्षेत्र में आई बाढ़ और दो महिला श्रद्धालुओं की मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से पहले प्रशासन ने चौकी प्रभारी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि बीते गुरुवार देर रात अचानक आए तेज जलप्रवाह ने शाकंभरी देवी क्षेत्र में तबाही मचा दी थी। भूरादेव मंदिर से लेकर मंदिर परिसर तक खड़े वाहन पानी में बह गए थे। कई दुकानों और निर्माण कार्यों को भी नुकसान पहुंचा था। हादसे में दो महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। सूत्रों की मानें तो घटना देर रात हुई, लेकिन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की शुरुआती कोशिशें होती रहीं, जबकि वरिष्ठ अधिकारी सुबह होने के बाद मौके पर पहुंचे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद रात में निगरानी और गश्त व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले शाकंभरी देवी चौकी प्रभारी संजय कुमार को निलंबित कर दिया गया। पुलिस विभाग का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर लापरवाही बरती गई थी। लेकिन प्रशासनिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या इतनी बड़ी घटना की जिम्मेदारी केवल चौकी प्रभारी की थी। जानकारों का कहना है कि यदि मौसम खराब होने और भारी बारिश की आशंका पहले से थी, तो स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। आखिर ऐसी क्या वजह रही कि घटना के दौरान बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे और सुबह होने के बाद घटनास्थल पहुंचे। क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले जवाबदेही तय करने की जल्दबाजी में कार्रवाई का दायरा केवल चौकी प्रभारी तक सीमित कर दिया गया। जबकि घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल चौकी प्रभारी के निलंबन के बाद यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर नए सवाल खड़े कर रहा है। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी तक सीमित रहती है या फिर अन्य स्तरों पर भी जवाबदेही तय की जाती है।


