लखनऊ में रविवार शाम आदि गंगा मां गोमती के तट पर भक्ति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मनकामेश्वर मंदिर की पीठाधीश्वर महंत देव्या गिरि के सानिध्य में मां गोमती की भव्य महाआरती संपन्न हुई। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ गया। महाआरती से पहले गोमती घाट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों ने घाट की सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया। इसी क्रम में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पैधरोपण भी किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया। अहिल्याबाई होल्कर नारी शक्ति और सनातन का प्रतीक कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंदों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं और आम लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे घाट पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और मां गोमती के जयकारों से परिसर गूंजता रहा।महाआरती के बाद महंत देव्या गिरि ने जनसमुदाय को संबोधित किया। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के योगदान को याद करते हुए कहा कि अहिल्याबाई नारी शक्ति, सुशासन और सनातन संस्कृति की सशक्त प्रतीक थीं। देशभर में मंदिरों और घाटों के संरक्षण में उनका योगदान आज भी प्रेरणादायी है। जल स्रोतों को स्वच्छ रखने की अपील महंत देव्या गिरि ने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी की बर्बादी और नदियों का प्रदूषण आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। उन्होंने सभी से जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और गोमती सहित सभी नदियों की निर्मलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने गौ-सेवा को राष्ट्र कल्याण से जोड़ते हुए कहा कि केवल चर्चा से नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से गौ-संरक्षण और सेवा को अपनाने से समाज और संस्कृति मजबूत होगी। उन्होंने लोगों से सेवा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।


