BJP के सत्ता में आने से ‘वाम’ को फायदा, क्या ममता गवां रही अपना कोर वोट बैंक?, फाल्टा के नतीजे TMC को करेंगे परेशान

BJP के सत्ता में आने से ‘वाम’ को फायदा, क्या ममता गवां रही अपना कोर वोट बैंक?, फाल्टा के नतीजे TMC को करेंगे परेशान

फाल्टा विधानसभा सीट के नतीजों में TMC को बड़ा झटका लगा और वह चौथे स्थान पर पहुंच गई। चुनाव के नतीजों ने बंगाल की राजनीति में नए सियासी समीकरण और अल्पसंख्यक वोटबैंक में बदलाव की चर्चा तेज कर दी है। 

Mamata Banerjee TMC: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फाल्टा विधानसभा सीट के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी के हाथों करारी हार मिलने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पतन अब साफ दिखने लगा है। हार के बाद TMC सीधे चौथे स्थान पर खिसक गई है। वहीं BJP पहले, CPI-M दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। इस नतीजे ने बंगाल में नई बहस छेड़ दी है कि क्या TMC अपनी खोई जमीन वापस पा सकेगी या उसकी जगह कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन लेगा।

TMC से दूर हुआ अल्पसंख्यक वोटबैंक

अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि बंगाल के जमीनी हालात ममता बनर्जी के हाथ से निकलते जा रहे हैं। TMC का सबसे मजबूत किला माने जाने वाला अल्पसंख्यक वोटबैंक अब उससे बहुत पीछे रह गया है। फाल्टा सीट पर चौथे नंबर पर आना इस बात का सबूत है कि जनता ने टीएमसी को पूरी तरह नकार दिया है। यही वजह है कि अब मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिलों में कांग्रेस और वामपंथ को अपनी वापसी का बड़ा मौका दिखाई दे रहा है। अगर यह दोनों पार्टियां एक बार फिर हाथ मिला लेती हैं, तो आने वाले नगर निकाय और उपचुनावों में टीएमसी का सूपड़ा साफ होना तय माना जा रहा है।

क्या उपचुनाव में दिखेगा नया गठबंधन

आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों को लेकर कांग्रेस और CPI-M के बीच पर्दे के पीछे से बातचीत का दौर शुरू हो गया है। वामपंथी नेताओं का दावा है कि अगर साल 2026 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, लेफ्ट और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) मिलकर लड़ते, तो वे आसानी से कम से कम 15 सीटें जीत सकते थे, जबकि अलग-अलग लड़ने के कारण उन्हें सिर्फ तीन सीटों पर संतोष करना पड़ा। अब रणनीति बदली जा रही है। बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए लेफ्ट और कांग्रेस एक मजबूत विपक्षी मोर्चा बनाने की तैयारी में हैं ताकि टीएमसी के खत्म होने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरा जा सके।

TMC कमजोर, BJP की चिंता बढ़ी

इस पूरे सियासी खेल के बीच में एक मोड़ सामने आ गया है कि साल 2026 में बंपर जीत हासिल करने वाली बीजेपी के लिए टीएमसी का पूरी तरह खत्म होना एक नया सिरदर्द बन सकता है। बीजेपी कभी नहीं चाहेगी कि टीएमसी बंगाल से पूरी तरह साफ हो जाए। इसकी वजह यह है कि अगर टीएमसी कमजोर होती है, तो विरोधी खेमे का करीब 40 फीसदी वोटबैंक सीधे वामपंथ और कांग्रेस गठबंधन के पाले में चला जाएगा। फाल्टा में CPI-M का टीएमसी से आगे निकलना इस बात का संकेत है कि बंगाल की लड़ाई अब ‘बीजेपी बनाम टीएमसी’ के बजाय सीधे ‘बीजेपी बनाम लेफ्ट’ में बदल सकती है, जो बीजेपी के लिए वैचारिक रूप से बड़ी चुनौती होगी।

  

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