अररिया में वन स्टॉप सेंटर के कार्यों की समीक्षा की गई है। जिला प्रशासन के निर्देश पर महिला विकास निगम की नोडल पदाधिकारी सह आईसीडीएस की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी कविता कुमारी ने यह समीक्षा की। इसमें पाया गया कि जिला परियोजना प्रबंधक अपने अधीनस्थ कर्मियों से समन्वय स्थापित नहीं कर रहे हैं, जिससे कई फाइलें लंबित हैं। इस लापरवाही के कारण बालिकाओं और पीड़ित महिलाओं को अल्प अवसान (अस्थायी आवास) में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि कार्यों के निष्पादन में पारदर्शिता की कमी है। समीक्षा के बाद, आईसीडीएस की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने कार्यालय आदेश जारी कर जिला परियोजना प्रबंधक को निर्देश दिया है। उन्हें संबंधित कर्मियों से समन्वय स्थापित कर वन स्टॉप सेंटर अररिया से संबंधित कार्यों का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस कार्य के लिए जिला परियोजना प्रबंधक अररिया को पूर्ण रूप से जवाबदेह ठहराया गया है। 5 दिनों तक के अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित इसके अतिरिक्त, सीपी बालिकाओं और पीड़ित महिलाओं के अल्प अवसान से संबंधित संपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी भी जिला परियोजना प्रबंधक को सौंपी गई है। इस बीच, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में बालिका एवं महिलाओं के लिए अधिकतम पांच दिनों तक के अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है। नोडल पदाधिकारी के आदेश के बाद, 06 वर्ष से ऊपर की सभी पीड़ित महिलाओं और सीएनसीपी बालिकाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर में अधिकतम 05 दिनों तक रात्रि आवासन यानी अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। वन स्टॉप सेंटर-सह-महिला हेल्पलाइन का मुख्य उद्देश्य शारीरिक, लैंगिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक या आर्थिक हिंसा की शिकार महिलाओं को एक छत के नीचे मनोवैज्ञानिक एवं विधिक परामर्श, चिकित्सीय सेवा, प्राथमिकी दर्ज कराने में सहयोग और अल्पाश्रय प्रदान करते हुए समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। अररिया में वन स्टॉप सेंटर के कार्यों की समीक्षा की गई है। जिला प्रशासन के निर्देश पर महिला विकास निगम की नोडल पदाधिकारी सह आईसीडीएस की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी कविता कुमारी ने यह समीक्षा की। इसमें पाया गया कि जिला परियोजना प्रबंधक अपने अधीनस्थ कर्मियों से समन्वय स्थापित नहीं कर रहे हैं, जिससे कई फाइलें लंबित हैं। इस लापरवाही के कारण बालिकाओं और पीड़ित महिलाओं को अल्प अवसान (अस्थायी आवास) में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि कार्यों के निष्पादन में पारदर्शिता की कमी है। समीक्षा के बाद, आईसीडीएस की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने कार्यालय आदेश जारी कर जिला परियोजना प्रबंधक को निर्देश दिया है। उन्हें संबंधित कर्मियों से समन्वय स्थापित कर वन स्टॉप सेंटर अररिया से संबंधित कार्यों का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस कार्य के लिए जिला परियोजना प्रबंधक अररिया को पूर्ण रूप से जवाबदेह ठहराया गया है। 5 दिनों तक के अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित इसके अतिरिक्त, सीपी बालिकाओं और पीड़ित महिलाओं के अल्प अवसान से संबंधित संपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी भी जिला परियोजना प्रबंधक को सौंपी गई है। इस बीच, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में बालिका एवं महिलाओं के लिए अधिकतम पांच दिनों तक के अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है। नोडल पदाधिकारी के आदेश के बाद, 06 वर्ष से ऊपर की सभी पीड़ित महिलाओं और सीएनसीपी बालिकाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर में अधिकतम 05 दिनों तक रात्रि आवासन यानी अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। वन स्टॉप सेंटर-सह-महिला हेल्पलाइन का मुख्य उद्देश्य शारीरिक, लैंगिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक या आर्थिक हिंसा की शिकार महिलाओं को एक छत के नीचे मनोवैज्ञानिक एवं विधिक परामर्श, चिकित्सीय सेवा, प्राथमिकी दर्ज कराने में सहयोग और अल्पाश्रय प्रदान करते हुए समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।


