अररिया में बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल हकीम उर्फ नवाब के ससुर मोहम्मद मुस्ताक को गिरफ्तार किया गया है। मुस्ताक पर नवाब को शरण देने और फर्जी दस्तावेज बनाने में सहयोग करने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, अब्दुल हकीम कई वर्षों से अररिया के रामपुर कोदरकट्टी पंचायत के मरंगी टोला में रह रहा था। उसने स्थानीय निवासी मोहम्मद मुस्ताक की बेटी से शादी की थी। शादी के बाद उसने ‘नवाब’ नाम से आधार कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा ली थी। अक्टूबर 2024 में पासपोर्ट सत्यापन के दौरान उसकी बांग्लादेशी नागरिकता का खुलासा हुआ था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने का आरोप इस मामले में मोहम्मद मुस्ताक पर मुख्य आरोपी अब्दुल हकीम को फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने का आरोप है। नगर थानेदार मनीष कुमार रजक ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मुस्ताक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अब्दुल हकीम लंबे समय से इस इलाके में छिपा हुआ था और शादी के बाद स्थानीय पहचान बनाने में सफल रहा। उसके फर्जी दस्तावेजों में स्थानीय लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। छिपकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस क्षेत्र में और भी बांग्लादेशी नागरिक छिपे हुए हैं या अन्य लोगों ने भी ऐसे दस्तावेज बनाने में मदद की है। यह घटना सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर बिहार के सीमावर्ती जिलों में उठ रहे सवालों को फिर से उठा रही है। अररिया जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुस्ताक से पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि नवाब ने अन्य किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और कितने लोगों की मदद से वह लंबे समय तक यहां छिपा रहा। अररिया में बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल हकीम उर्फ नवाब के ससुर मोहम्मद मुस्ताक को गिरफ्तार किया गया है। मुस्ताक पर नवाब को शरण देने और फर्जी दस्तावेज बनाने में सहयोग करने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, अब्दुल हकीम कई वर्षों से अररिया के रामपुर कोदरकट्टी पंचायत के मरंगी टोला में रह रहा था। उसने स्थानीय निवासी मोहम्मद मुस्ताक की बेटी से शादी की थी। शादी के बाद उसने ‘नवाब’ नाम से आधार कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा ली थी। अक्टूबर 2024 में पासपोर्ट सत्यापन के दौरान उसकी बांग्लादेशी नागरिकता का खुलासा हुआ था, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने का आरोप इस मामले में मोहम्मद मुस्ताक पर मुख्य आरोपी अब्दुल हकीम को फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने का आरोप है। नगर थानेदार मनीष कुमार रजक ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मुस्ताक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अब्दुल हकीम लंबे समय से इस इलाके में छिपा हुआ था और शादी के बाद स्थानीय पहचान बनाने में सफल रहा। उसके फर्जी दस्तावेजों में स्थानीय लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। छिपकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस क्षेत्र में और भी बांग्लादेशी नागरिक छिपे हुए हैं या अन्य लोगों ने भी ऐसे दस्तावेज बनाने में मदद की है। यह घटना सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर बिहार के सीमावर्ती जिलों में उठ रहे सवालों को फिर से उठा रही है। अररिया जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुस्ताक से पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि नवाब ने अन्य किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और कितने लोगों की मदद से वह लंबे समय तक यहां छिपा रहा।


