राज्यसभा सांसद फंड से नवनिर्मित मॉडल भवन पर चला बुलडोजर:राकेश सिन्हा बोले- अज्ञानता में बख्तियार खिलजी बन गए हैं अधिकारी; ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग

राज्यसभा सांसद फंड से नवनिर्मित मॉडल भवन पर चला बुलडोजर:राकेश सिन्हा बोले- अज्ञानता में बख्तियार खिलजी बन गए हैं अधिकारी; ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग

बेगूसराय के भगवानपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित ई-किसान भवन के सामने राज्यसभा के तत्कालीन सांसद राकेश सिन्हा के फंड से बने निर्मित सांस्कृतिक सह वाचनालय मॉडल भवन को तोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के तोड़ा गया है। जिससे भारी आक्रोश है। 10 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन को अचानक तोड़े जाने को लेकर ग्रामीणों ने इसे सरकारी राशि का खुला दुरुपयोग बताया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि किसी भी सरकारी भवन को ध्वस्त करने के लिए तय गाइडलाइन और नीलामी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। प्रखंड मुख्यालय परिसर में आधुनिक प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवन निर्माण के लिए चिह्नित भूमि पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। इस मामले में तेघड़ा एसडीओ राकेश कुमार ने बताया कि भवन निर्माण विभाग द्वारा निलामी प्रक्रिया किया जाता है। अधिकारियों से बात कर आगे की प्रक्रिया किया जाएगा। नियमों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमंत चौधरी, पंसस हरिओम शर्मा, स्थानीय प्रदीप कुमार, आलोक कुमार, प्रवीण शेखर, रूपेश कुमार का कहना है कि नियमों के खिलाफ जाकर बिना ग्रामीण स्तर पर जानकारी साझा किए या नीलामी प्रक्रिया अपनाए भवन को मलबे में तब्दील कर दिया गया। नियम के खिलाफ कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। तोड़े गए नवनिर्मित भवन के बदले क्षेत्र के युवाओं के लिए एक वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराया जाए।

रातों-रात बुलडोजर चला दिया वहीं, पूर्व सांसद प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा है कि राज्यसभा में रहते हुए मेरी प्राथमिकता पुस्तकालय-वाचनालय का निर्माण था। अभी भी कुछ तैयार हो रहा है। उसी दौरान भगवानपुर के बच्चों-अभिभावकों का आग्रह एक वाचनालय बनाने का था। मेरे लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय था, अनुशंसा किया। प्रशासन ने वैधानिक रूप से जगह दी, बन गया, लोग संतुष्ट थे। अब अचानक ग्रामीणों का फोन आया स्थानीय प्रशासन ने रातों-रात बुलडोजर से उसे ध्वस्त कर दिया। शायद उन्हें कोई और भवन बनाना था। जरूर ऐसे लोग मॉस्को के मेयर और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल से अधिक बौद्धिकता रखते होंगे। अब इस कहानी को याद करके रखना होगा। खिलजी ने नालंदा की लाइब्रेरी जलाया था। सीजर ने ग्रेट लाइब्रेरी ऑफ अलेक्जेंड्रिया को आग के हवाले कर दिया था। सीओ, एसडीओ, बीडीओ बच्चों-अभिभावकों के सामने खिलजी और सीजर बनकर अज्ञानता-अंधकार में रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। शायद उनके बच्चों को वाचनालय की जरूरत नहीं हो। लेकिन हिंदुस्तान संत, ज्ञान, तप, सत गुण परंपरा का देश है। हम नया वाचनालय बना लेंगे, ग्रामवासी निश्चिंत रहें। समाज की ताकत हमने काँगथोंग और सूजा, दो स्थानों पर प्रयोग के रूप में देखा है। केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार है लेखक और वरिष्ठ पत्रकार महेश भारती कहते हैं कि कभी इतिहास में बख्तियार खिलजी ने नालंदा में पुस्तकालय, विश्वविद्यालय तोड़ा और जलाया था। राकेश सिन्हा अब सांसद नहीं हैं, उन्हीं के पार्टी की केंद्र और राज्य में सरकार है। जिले में उन्हीं के पार्टी के सांसद हैं। जहां पुस्तकालय वाचनालय भवन टूटा, वहां के विधायक भी उन्हीं के दल के थे। आखिर किस विकास के नाम पर दो वर्ष पूर्व उद्घाटित बिल्डिंग को जमींदोज कर दिया गया। उस पुस्तकालय वाचनालय भवन की अनुशंसा स्थानीय लोगों की मांग पर राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने किया था। बेगूसराय पुस्तकालय की धरती है, आज भी जिले के गोदरगावां का विप्लवी पुस्तकालय देश स्तर को प्रेरणा दे रहा है‌। आंदोलन में बेगूसराय के गांव-गांव में आजादी के दीवानों ने पुस्तकालय खोला। मंझौल का श्री जगदंबी पुस्तकालय 1930-32 आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है। आज के अधिकारी को योजनाओं के कमीशन राशि से मतलब है, पुस्तकालय वाचनालय से नहीं। विपक्ष दलों को भी घेरा महेश भारती ने आगे कहा कि खिलजी, हिटलर और सीजर की तरह पुस्तकालय विनष्ट करने वाले लोगों को बेगूसराय बर्दाश्त नहीं करता है‌। यहां विप्लवी है, पुस्तकें हैं। राकेश सिन्हा को भगवानपुर के लोगों को सच बताना चाहिए। आखिर दो वर्ष पूर्व बने भवन जिस पर देश का लाखों रूपए लागत आए, उन्हें उजाड़ने की दरकार कैसे हो गई। कौन है आज का खिलजी जो बेगूसराय में नापाक बनकर पुस्तकालय भवन ढहा रहा है। वहां के विपक्षी दलों को भी लगता है सांप सूंघ गया है। बेगूसराय के भगवानपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित ई-किसान भवन के सामने राज्यसभा के तत्कालीन सांसद राकेश सिन्हा के फंड से बने निर्मित सांस्कृतिक सह वाचनालय मॉडल भवन को तोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के तोड़ा गया है। जिससे भारी आक्रोश है। 10 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन को अचानक तोड़े जाने को लेकर ग्रामीणों ने इसे सरकारी राशि का खुला दुरुपयोग बताया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि किसी भी सरकारी भवन को ध्वस्त करने के लिए तय गाइडलाइन और नीलामी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। प्रखंड मुख्यालय परिसर में आधुनिक प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवन निर्माण के लिए चिह्नित भूमि पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। इस मामले में तेघड़ा एसडीओ राकेश कुमार ने बताया कि भवन निर्माण विभाग द्वारा निलामी प्रक्रिया किया जाता है। अधिकारियों से बात कर आगे की प्रक्रिया किया जाएगा। नियमों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप भाजपा मंडल अध्यक्ष हेमंत चौधरी, पंसस हरिओम शर्मा, स्थानीय प्रदीप कुमार, आलोक कुमार, प्रवीण शेखर, रूपेश कुमार का कहना है कि नियमों के खिलाफ जाकर बिना ग्रामीण स्तर पर जानकारी साझा किए या नीलामी प्रक्रिया अपनाए भवन को मलबे में तब्दील कर दिया गया। नियम के खिलाफ कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। तोड़े गए नवनिर्मित भवन के बदले क्षेत्र के युवाओं के लिए एक वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराया जाए।

रातों-रात बुलडोजर चला दिया वहीं, पूर्व सांसद प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा है कि राज्यसभा में रहते हुए मेरी प्राथमिकता पुस्तकालय-वाचनालय का निर्माण था। अभी भी कुछ तैयार हो रहा है। उसी दौरान भगवानपुर के बच्चों-अभिभावकों का आग्रह एक वाचनालय बनाने का था। मेरे लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय था, अनुशंसा किया। प्रशासन ने वैधानिक रूप से जगह दी, बन गया, लोग संतुष्ट थे। अब अचानक ग्रामीणों का फोन आया स्थानीय प्रशासन ने रातों-रात बुलडोजर से उसे ध्वस्त कर दिया। शायद उन्हें कोई और भवन बनाना था। जरूर ऐसे लोग मॉस्को के मेयर और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल से अधिक बौद्धिकता रखते होंगे। अब इस कहानी को याद करके रखना होगा। खिलजी ने नालंदा की लाइब्रेरी जलाया था। सीजर ने ग्रेट लाइब्रेरी ऑफ अलेक्जेंड्रिया को आग के हवाले कर दिया था। सीओ, एसडीओ, बीडीओ बच्चों-अभिभावकों के सामने खिलजी और सीजर बनकर अज्ञानता-अंधकार में रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। शायद उनके बच्चों को वाचनालय की जरूरत नहीं हो। लेकिन हिंदुस्तान संत, ज्ञान, तप, सत गुण परंपरा का देश है। हम नया वाचनालय बना लेंगे, ग्रामवासी निश्चिंत रहें। समाज की ताकत हमने काँगथोंग और सूजा, दो स्थानों पर प्रयोग के रूप में देखा है। केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार है लेखक और वरिष्ठ पत्रकार महेश भारती कहते हैं कि कभी इतिहास में बख्तियार खिलजी ने नालंदा में पुस्तकालय, विश्वविद्यालय तोड़ा और जलाया था। राकेश सिन्हा अब सांसद नहीं हैं, उन्हीं के पार्टी की केंद्र और राज्य में सरकार है। जिले में उन्हीं के पार्टी के सांसद हैं। जहां पुस्तकालय वाचनालय भवन टूटा, वहां के विधायक भी उन्हीं के दल के थे। आखिर किस विकास के नाम पर दो वर्ष पूर्व उद्घाटित बिल्डिंग को जमींदोज कर दिया गया। उस पुस्तकालय वाचनालय भवन की अनुशंसा स्थानीय लोगों की मांग पर राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने किया था। बेगूसराय पुस्तकालय की धरती है, आज भी जिले के गोदरगावां का विप्लवी पुस्तकालय देश स्तर को प्रेरणा दे रहा है‌। आंदोलन में बेगूसराय के गांव-गांव में आजादी के दीवानों ने पुस्तकालय खोला। मंझौल का श्री जगदंबी पुस्तकालय 1930-32 आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है। आज के अधिकारी को योजनाओं के कमीशन राशि से मतलब है, पुस्तकालय वाचनालय से नहीं। विपक्ष दलों को भी घेरा महेश भारती ने आगे कहा कि खिलजी, हिटलर और सीजर की तरह पुस्तकालय विनष्ट करने वाले लोगों को बेगूसराय बर्दाश्त नहीं करता है‌। यहां विप्लवी है, पुस्तकें हैं। राकेश सिन्हा को भगवानपुर के लोगों को सच बताना चाहिए। आखिर दो वर्ष पूर्व बने भवन जिस पर देश का लाखों रूपए लागत आए, उन्हें उजाड़ने की दरकार कैसे हो गई। कौन है आज का खिलजी जो बेगूसराय में नापाक बनकर पुस्तकालय भवन ढहा रहा है। वहां के विपक्षी दलों को भी लगता है सांप सूंघ गया है।  

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