ज्ञानवापी-श्रीकाशी विश्वनाथ धाम जमीन अदला-बदली वाद में कोर्ट ने शनिवार को सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस वाद में बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी पर 500 रुपए हर्जाना लगाया है। साथ ही इस वाद में जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर भी दिया है। सुनवाई की अगली तारीख 19 अगस्त तय की गयी है। वहीं इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद् के जवाब दाखिल करने का अधिकार ही समाप्त कर दिया है। इसके पहले जवाबदेही न दाखिल करने पर कोर्ट ने मंदिर न्यास परिषद् पर 300 रुपए जुर्माना लगाया था। 500 रुपए हर्जाने के साथ जमा करें जवाब ज्ञानवापी-श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर जमीन की अदला-बदली से नाराज बनारस बार के पूर्व महमंत्री नित्यानंद राय ने एक याचिका दायर की थी। इस याचिका पर शनिवार को सुनवाई करते हुए लघु वाद न्यायधीश तूलिका बंधु ने अंजमुन इंतेजामिया पर 500 रुपए का हर्जाना लगाते हुए अगली तारीख पर इस वाद में जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतेजामिया की ओर से जवाबदेही दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया था। जिसपर कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है। 500 हर्जाने के साथ कोर्ट ने यह अंतिम अवसर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर न्यास का अवसर समाप्त वादी नित्यानंद राय ने कोर्ट को बताया की विपक्षी पिछले साल ही कोर्ट से वाद की प्रति प्राप्त कर चुके हैं लेकिन आज तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। उन्होंने तर्क दिया की कानून के अनुसार निर्धारित समय सीमा के अंदर जवाब दाखिल होना चाहिए लेकिन लगातार समाय लिया जा रहा है। इसपर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के जवाब दाखिल करने के अधिकार को समाप्त कर दिया। अब जानिए क्या है याचिका में… बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने दाखिल किया है। उन्होंने विश्वनाथ कॉरिडोर (धाम) के नाम पर समस्त अधिग्रहित भूमि का स्वामित्व विश्वनाथ मंदिर के पक्ष में घोषित करने और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी से जमीन की अदला-बदली सबंधित डीड को शून्य घोषित करने की मांग की है। वाद में कहा गया है कि विश्वनाथ कॉरिडोर में राज्य सरकार ने अगल-बगल की जमीन अधिग्रहित की है। उसका राज्य के नाम से बैनामा हुआ है। उस अधिग्रहित भूमि का स्वामित्व आदिविश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से किया जाए। वादी ने कहा है कि दो साल पहले मुस्लिम पक्ष से विश्वनाथ मंदिर परिसर के जिस जमीन की अदला-बदली की गई है, वह गलत है। उक्त जमीन का स्वामित्व अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के पास नहीं है। साथ ही डीड में दिखाई गई चौहद्दी भी गलत है। इसलिए उक्त डीड शून्य घोषित किया जाए। वाद में उत्तर प्रदेश सरकार, काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को प्रतिवादी बनाया गया है। वादी ने त्वरित सुनवाई की गुहार लगाई है।


