लेफ्टिनेंट जनरल बने श्रीगंगानगर के सुरेश भाम्भू:बर्फीली चोटियों से लेकर नॉर्थईस्ट के घने जंगलों में देश सेवा में डटे रहे

लेफ्टिनेंट जनरल बने श्रीगंगानगर के सुरेश भाम्भू:बर्फीली चोटियों से लेकर नॉर्थईस्ट के घने जंगलों में देश सेवा में डटे रहे

श्रीगंगानगर जिले के कुलडियांवाली ढाणी (चक 21 ML) के सैनिक जनरल सुरेश भाम्भू को लेफ्टिनेंट जनरल के प्रतिष्ठित पद के लिए मंजूरी मिल गई है। 1992 में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में भारतीय सेना में भर्ती हुए मेजर जनरल सुरेश भाम्भू ने 34 वर्षों की सेवा में अपनी लगन, रणनीतिक कुशलता और नेतृत्व क्षमता से सभी को प्रभावित किया। हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर नॉर्थईस्ट के घने जंगलों तक, हर मुश्किल मिशन में भाम्भू ने अपनी मिसाल कायम की। मेजर जनरल सुरेश भाम्भू को पहले ही युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की ओर से दो बार कमेंडेशन कार्ड भी मिल चुके हैं। अभी हाल ही में वे नई दिल्ली में तैनात थे। इससे पहले उन्होंने असम राइफल्स में इंस्पेक्टर जनरल के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दीं। भाम्भू ने अपनी मिलिट्री नींव सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ से रखी, जहां अनुशासन और देशभक्ति की शिक्षा ने उन्हें एक सच्चा सैनिक बनाया। मेजर जनरल सुरेश भाम्भू सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं। उनके दादा हरि सिंह भाम्भू ब्रिटिश आर्मी में सेवा दे चुके थे। पिता चौधरी रामदयाल भाम्भू ने भी परिवार को सैन्य परंपरा दी। भाम्भू के दो डॉक्टर बेटियां हैं।

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