महाराष्ट्र में विधान परिषद की 17 सीटों पर होने वाले चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है। जहां एक ओर विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (MVA) ने सीट बंटवारा फाइनल कर लिया है, दूसरी ओर भाजपा-शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी सुनेत्रा पवार की महायुति में अभी भी कई सीटों को लेकर खींचतान जारी है। इस बीच, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठवाड़ा क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन कर विपक्ष को तगड़ा झटका दिया है। कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले लातूर जिले में पूर्व कांग्रेस विधायक विनायक पाटिल के नेतृत्व में 25000 कार्यकर्ता शिवसेना में शामिल हुए।
25 हजार से अधिक कार्यकर्ता शिवसेना में शामिल
अहमदपुर में गुरुवार को आयोजित एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में करीब 25,000 से अधिक कार्यकर्ताओं ने शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। इसे मराठवाड़ा के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा पक्ष प्रवेश माना जा रहा है। इस बंपर जॉइनिंग के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि लातूर जिले में अब शिवसेना की ताकत कई गुना बढ़ गई है।
कांग्रेस के मजबूत गढ़ में शिवसेना की बड़ी सेंध
पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के दौर से लातूर को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में हजारों कार्यकर्ताओं का शिवसेना में शामिल होना स्थानीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद मराठवाड़ा में शिवसेना की संगठनात्मक ताकत कई गुना बढ़ गई है।
विपक्ष पर बरसे एकनाथ शिंदे
इस विशाल रैली को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने महाविकास आघाड़ी (एमवीए) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस पक्ष प्रवेश समारोह में 25 हजार से ज्यादा लोगों ने स्वेच्छा से शिवसेना का दामन थामा है।
शिंदे ने कहा, “आज इस समारोह में 25 हजार लोगों ने शिवसेना में प्रवेश किया है। यह कार्यक्रम मराठवाड़ा का सबसे बड़ा पक्ष प्रवेश समारोह बन गया है। यह भीड़ भाड़े पर जमा की हुई नहीं है, बल्कि विनायकराव के प्रति लोगों का प्यार है। अगर विरोधियों की आंखों में कचरा चला गया है, तो वे यहां आएं और अपनी आंखें खोलकर इस जनसैलाब को देखें। मेरी लाडली बहनों और भाइयों का यह प्यार और लगाव पैसों से खरीदा नहीं जा सकता।”
‘हमारा एजेंडा सत्ता नहीं, जनसेवा है’
एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि शिवसेना को मराठवाड़ा ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। शिवसेना में शामिल होने वाले लोग किसी स्वार्थ या पद की लालसा से नहीं, बल्कि पार्टी की विचारधारा और जनसेवा के प्रति विश्वास के कारण आए हैं।
उन्होंने कहा, “मैं एक बार जो वादा कर देता हूं, उसे हर हाल में निभाता हूं। पिछले तीन वर्षों से लगातार लोग शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। हमारा एजेंडा सत्ता या कुर्सी नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है।”
उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और कार्यकर्ताओं का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह स्नेह किसी भी कीमत पर खरीदा नहीं जा सकता।
2029 की तैयारी में जुटी शिवसेना
भले ही राज्य के प्रमुख चुनाव समाप्त हो चुके हो, लेकिन अब भी शिंदे शिवसेना संगठन का विस्तार पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन शिंदे खेमे ने अभी से राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
पार्टी लगातार विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे भी ‘शिवसंवाद दौरे’ के जरिए राज्य भर में संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


