नमाज पढ़कर लौट रहे लोगों से भरी नाव पलटी;VIDEO:पूर्णिया में नाव में सवार ने तैर कर बचाई जान, प्रशासन से की पुल बनाने की मांग

नमाज पढ़कर लौट रहे लोगों से भरी नाव पलटी;VIDEO:पूर्णिया में नाव में सवार ने तैर कर बचाई जान, प्रशासन से की पुल बनाने की मांग

पूर्णिया के अमौर में हादसा होते-होते टल गया। दास नदी के बागवाना घाट पर नमाज पढ़कर लौट रहे लोगों से भरी नाव अचानक पानी भरने से डूबने लगी। नाव में सवार बच्चों, बुजुर्गों और युवकों ने तैरकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। बागवाना गांव और आसपास के इलाकों के लोग नमाज अदा करने के लिए दास नदी के पूरब पार गए थे। नमाज के बाद जब सभी लोग नाव से वापस अपने घर लौट रहे थे, तभी नदी के बीच नाव में पानी भरने लगा। देखते ही देखते नाव असंतुलित हो गई और डूबने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नाव पहले से ही जर्जर हालत में थी। बीच नदी में नाव का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी तेजी से अंदर आने लगा। नाविक ने किसी तरह नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन किनारे पहुंचते ही नाव पूरी तरह पानी में समा गई। इसके बाद सभी लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई। नाव में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद नाव पर सवार मुकर्रम हुसैन, इमरान, मो. मजहर, सैदुर्रहमान, गुलाम साबिर, इजहार, एहरार, जुल्फकार, सद्दाम हुसैन, अब्दुल रशीद, नसीम, मुद्दीन, असगर, अमीरुल हक, जमील और सोहेल समेत कई अन्य लोग सुरक्षित बाहर निकल आए। हादसे के समय नाव में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। समाजसेवी मुकर्रम हुसैन ने बताया कि ज्ञानडोव पंचायत के बागवाना वार्ड 8 और 9, रंगरैया लालटोली पंचायत के वार्ड 8, 9 और 13 और खाबी महिनगांव पंचायत के करीब 5 हजार लोगों का रोजाना आवागमन इसी घाट से होता है। साल 2016 से इस घाट का संचालन सरकारी स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन पिछले 10 सालों में यहां नई नाव मुहैया नहीं कराई गई। पुरानी और जर्जर नावों के सहारे लोगों की जान जोखिम में डालकर आवागमन कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि समय रहते नई नाव की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, घाट पर नई नाव उपलब्ध कराने और स्थायी समाधान के लिए पुल निर्माण की मांग की है।
वहीं आम आदमी पार्टी के अमौर विधानसभा अध्यक्ष भाई अबू कैस ने भी प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में नाव ही लोगों की जिंदगी का सहारा है, वहां सुरक्षित नाव की व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर जरूरत वाले घाटों पर नाव की व्यवस्था नहीं की गई तो लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अमौर के सीओ धीरेंद्र कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। राहत की बात यह है कि सभी लोग सुरक्षित हैं। फिलहाल सरकारी स्तर पर नई नाव खरीदने की कोई योजना नहीं है। आगे किसी व्यक्ति के पास निजी नाव है तो उसका लॉग बुक खोलकर नियमानुसार संचालन की अनुमति दी जा सकती है। पूर्णिया के अमौर में हादसा होते-होते टल गया। दास नदी के बागवाना घाट पर नमाज पढ़कर लौट रहे लोगों से भरी नाव अचानक पानी भरने से डूबने लगी। नाव में सवार बच्चों, बुजुर्गों और युवकों ने तैरकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। बागवाना गांव और आसपास के इलाकों के लोग नमाज अदा करने के लिए दास नदी के पूरब पार गए थे। नमाज के बाद जब सभी लोग नाव से वापस अपने घर लौट रहे थे, तभी नदी के बीच नाव में पानी भरने लगा। देखते ही देखते नाव असंतुलित हो गई और डूबने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नाव पहले से ही जर्जर हालत में थी। बीच नदी में नाव का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी तेजी से अंदर आने लगा। नाविक ने किसी तरह नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन किनारे पहुंचते ही नाव पूरी तरह पानी में समा गई। इसके बाद सभी लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई। नाव में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद नाव पर सवार मुकर्रम हुसैन, इमरान, मो. मजहर, सैदुर्रहमान, गुलाम साबिर, इजहार, एहरार, जुल्फकार, सद्दाम हुसैन, अब्दुल रशीद, नसीम, मुद्दीन, असगर, अमीरुल हक, जमील और सोहेल समेत कई अन्य लोग सुरक्षित बाहर निकल आए। हादसे के समय नाव में बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। समाजसेवी मुकर्रम हुसैन ने बताया कि ज्ञानडोव पंचायत के बागवाना वार्ड 8 और 9, रंगरैया लालटोली पंचायत के वार्ड 8, 9 और 13 और खाबी महिनगांव पंचायत के करीब 5 हजार लोगों का रोजाना आवागमन इसी घाट से होता है। साल 2016 से इस घाट का संचालन सरकारी स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन पिछले 10 सालों में यहां नई नाव मुहैया नहीं कराई गई। पुरानी और जर्जर नावों के सहारे लोगों की जान जोखिम में डालकर आवागमन कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि समय रहते नई नाव की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, घाट पर नई नाव उपलब्ध कराने और स्थायी समाधान के लिए पुल निर्माण की मांग की है।
वहीं आम आदमी पार्टी के अमौर विधानसभा अध्यक्ष भाई अबू कैस ने भी प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में नाव ही लोगों की जिंदगी का सहारा है, वहां सुरक्षित नाव की व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर जरूरत वाले घाटों पर नाव की व्यवस्था नहीं की गई तो लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अमौर के सीओ धीरेंद्र कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। राहत की बात यह है कि सभी लोग सुरक्षित हैं। फिलहाल सरकारी स्तर पर नई नाव खरीदने की कोई योजना नहीं है। आगे किसी व्यक्ति के पास निजी नाव है तो उसका लॉग बुक खोलकर नियमानुसार संचालन की अनुमति दी जा सकती है।  

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