जनगणना को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है लेकिन इसमें कई अजीत किस्से भी सामने आ रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र के एक प्रगणक ने एक सप्ताह बीत जाने पर भी जब काम शुरू नहीं किया तो उससे पूछताछ की गई। कारण पूछने पर उसने शांति से जवाब दिया कि उसका मोबाइल टूट गया है, जिससे जनगणना नहीं कर पा रहा है। प्रगणक ने अधिकारियों से नया फोन दिलाने को कहा, जिससे वह जनगणना शुरू करा सके। निगरानी कर रहे अधिकारियों ने अपना माथा पकड़ लिया। प्रगणक पेशे से शिक्षक है और अधिकारी ने उसे चेतावनी दी है।
दरअसल स्वगणना खत्म होने के बाद मकानों की गणना का काम 22 मई से शुरू हो गया है। सभी शिक्षकों को हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) दिए गए हैं। शिक्षक के HLB में जब जनगणना शुरू नहीं हुई तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए। जब उससे सवाल किया गया तो उसने मोबाइल टूटने की बात कही। अधिकारी इसे बहाना मान रहे हैं। जनगणना मोबाइल एप पर ही हो रही है। इसलिए कई ऐसे प्रगणक जिनके पास पुराने मोबाइल हैं, उनके सामने समस्या खड़ी हो गई है। घरों पर मिल रहे सीधे सवाल के उल्टे जवाब जनगणना करने के लिए जब प्रगणक लोगों के घर पहुंच रहे हैं तो उन्हें सीधे सवाल के उल्टे जवाब दिए जा रहे हैं। घर में सदस्यों की संख्या और कमरों की संख्या पूछने पर घरवाले सीधे बताने से इनकार कर रहे हैं। शौचालय, टाइल्स,पीने के पानी, गाड़ी और यहां तक कि परिवार के सदस्यों की संख्या पूछने पर भी सीधा जवाब नहीं दे रहे। एक प्रगणक ने जब कमरों की संख्या पूछी तो घर के मालिक ने कहा कि तुम इंजीनियर हो क्या कि कमरों की संख्या तुम्हें बताएं। इधर प्रशासन की सख्ती भी जारी है। जनगणना कार्य में लापरवाही या रुचि न लेने वाले 100 से अधिक प्रगणकों का वेतन रोक दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि तय समयसीमा में काम पूरा कराने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और सुस्ती बरतने वालों पर कार्रवाई होगी। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 9332 गणना ब्लाक बनाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर तक 8370 ब्लाकों में मकान और परिवारों की गणना चल रही थी, जबकि 397 ब्लाकों में प्रगणकों ने महज सात दिन के भीतर कार्य पूरा कर लिया। हालांकि 565 गणना ब्लाकों में अब तक काम शुरू नहीं हो सका है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।


