आसाराम केस में दो आरोपी बरी:पीड़िता रो पड़ी: बोली- इन्हीं लोगों ने मुझे आसाराम तक पहुंचाया; पिता बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

आसाराम केस में दो आरोपी बरी:पीड़िता रो पड़ी: बोली- इन्हीं लोगों ने मुझे आसाराम तक पहुंचाया; पिता बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम यौन शोषण मामले में सहआरोपी शिल्पी और शरद को बरी कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने दोनों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद शाहजहांपुर निवासी पीड़िता भावुक हो गई और रो पड़ी। उसने अपने पिता से कहा कि जिन लोगों ने पूरी साजिश की शुरुआत की, उन्हें अदालत ने कैसे बरी कर दिया। पीड़िता बोली- अगर वे मुझे आसाराम के पास न ले जाते तो घटना नहीं होती। पीड़िता का कहना है कि शिल्पी और शरद ने ही उसे आसाराम के पास पहुंचाया था। अगर वे ऐसा नहीं करते तो उसके साथ यह घटना कभी नहीं होती। फैसले से आहत पीड़िता ने अपने पिता से न्याय के लिए आगे लड़ाई जारी रखने की बात कही। पिता ने दिलासा दिया, बोले- सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे पीड़िता के पिता ने बेटी को ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बचने नहीं दिया जाएगा और न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वार्डन ने कहा था- बच्ची पर प्रेत का साया है पीड़िता के पिता ने घटना को याद करते हुए बताया कि उस समय शिल्पी छात्रावास में वार्डन थी। एक रात उनकी बेटी को चक्कर आया और वह गिर गई। साथ की छात्राओं के शोर मचाने पर शिल्पी वहां पहुंची और उसने कहा कि बच्ची पर प्रेत का साया है। उसी दौरान शरद भी वहां आ गया था। दोनों ने मिलकर बच्ची से एक मंत्र का जाप करवाने की बात कही थी। फोन कर बताया था- बेटी गंभीर रूप से बीमार है पिता के मुताबिक, शिल्पी ने उन्हें फोन कर बताया था कि उनकी बेटी गंभीर रूप से बीमार है। उन्होंने उससे कहा था कि संस्थान में उनके एक लाख रुपए एडवांस जमा हैं, इसलिए बच्ची का बेहतर इलाज कराया जाए। उन्होंने यह भी बताया था कि शाहजहांपुर से छिंदवाड़ा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है, इसलिए वहां पहुंचने में समय लगेगा। छिंदवाड़ा पहुंचने पर बेटी से मिलने नहीं दिया गया पिता ने बताया कि जब वे छिंदवाड़ा पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि छात्रावास बंद हो चुका है और अब अगले दिन सुबह ही बेटी से मुलाकात हो सकेगी। उन्होंने अपने छोटे बेटे से बात कराने को कहा, जो वहीं पढ़ाई करता था। बेटे को भी बहन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि बच्चों को परिवार से ज्यादा मिलने नहीं दिया जाता था। कहा गया- आसाराम ने बुलाया है पिता के अनुसार, अगले दिन सुबह शिल्पी ने बताया कि उसने आसाराम से बात कर ली है और उन्होंने बच्ची के लिए एक मंत्र बताया है। शिल्पी ने यह भी कहा कि आसाराम का आदेश है कि बच्ची को उनके पास भेजा जाए, ताकि वह उस पर बताए गए प्रेत बाधा का उपचार कर सकें। पिता बोले- साजिश की शुरुआत इन्हीं लोगों ने की पीड़िता के पिता का कहना है कि उन्होंने उसी समय शिल्पी से सवाल किया था कि यदि आसाराम इतने बड़े संत हैं तो उनके आश्रम में किसी बच्चे पर प्रेत का साया कैसे हो सकता है। उनका आरोप है कि पूरी साजिश की शुरुआत शिल्पी और शरद ने ही की थी। इसलिए दोनों के खिलाफ आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) का मामला बनता है। ट्रायल कोर्ट ने दी थी 20-20 साल की सजा पिता ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने से उनकी बेटी को गहरा आघात पहुंचा है। अब परिवार न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

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