इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की मनमानी और न्यायालय के आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए अवैध हिरासत के एक मामले में प्रदेश सरकार को पीड़ित को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
साथ ही कोर्ट ने यह राशि दोषी थाना प्रभारी से वसूलने की छूट देते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के आदेशों के प्रति पुलिस का असंवेदनशील रवैया और मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं माननीय न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने अनिल सोनी को अवैध रूप से हिरासत में रखने के एवज में पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। क्या है पूरा मामला जानिए
याची अनिल सोनी का एक युवती के साथ प्रेम संबंध था। बाद में दोनों के संबंधों में खटास आ गई, जिसके बाद युवती ने सिद्धार्थनगर के इटवा थाने में अनिल के खिलाफ बीएनएस और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करा दी। इस एफआईआर को अनिल सोनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। एक अन्य खंडपीठ ने गत एक अप्रैल को प्रारंभिक सुनवाई के बाद अनिल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के समय सरकारी वकील मौजूद थे, जिससे यह साफ था कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को इस रोक की जानकारी थी। इसके बावजूद कोर्ट की वेबसाइट पर आदेश अपलोड होने से पहले ही गत चार अप्रैल को इटवा थाने के तत्कालीन एसएचओ ने अनिल सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अनिल के परिवार और उनके वकीलों ने पुलिस को फोन पर और हलफनामा भेजकर कोर्ट के स्टे ऑर्डर की जानकारी देने की कोशिश की लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और उनके साथ बदसलूकी भी की। हाईकोर्ट ने बेहद नाराजगी जताई
हाईकोर्ट ने इस बात पर बेहद नाराजगी जताई कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका होने और कोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद भी पुलिस ने अपनी गलती नहीं सुधारी और अनिल को जेल में ही रखा। कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण चलन बनता जा रहा है कि या तो सरकारी वकील न्यायालय के आदेशों की जानकारी पुलिस अधिकारियों को नहीं देते, या फिर पुलिस अधिकारी कोर्ट के आदेशों के प्रति अनादर दिखाते हुए दुर्भावनापूर्ण तरीके से काम करते हैं। एक माह में दें मुआवजा
कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार को एक महीने के भीतर पीड़ित अनिल सोनी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार को यह राशि दोषी एसएचओ संजय कुमार मिश्र से वसूलने की छूट दी। साथ ही कर्तव्य में लापरवाही और न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में उनके खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के पुलिस अधीक्षक को 13 जुलाई तक इस आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि वह ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें कोर्ट में हाजिर होना होगा।


