औरंगाबाद के कलेक्ट्रेट स्थित योजना भवन के सभा कक्ष में आज संभावित बाढ़, सुखाड़ और भीषण गर्मी से निपटने की तैयारियों को लेकर जिला स्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की मंत्री सह जिला प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने की। बैठक में जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने के लिए की गई तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा की ओर से प्रभारी मंत्री को पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से दृश्य प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संभावित आपदा से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में पुनपुन, सोन, बटाने, बतरे, अदरी और केसहर प्रमुख नदियां हैं और साल 2021 से 2025 तक सामान्य से कम वर्षापात दर्ज किया गया है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार साल 2026 में भी जून से सितंबर तक सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। बैठक में बताया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में वर्षा मापक यंत्र और स्वचालित मौसम केंद्र सक्रिय हैं। बाढ़ राहत सामग्री, पॉलीथीन शीट, नाव, सामुदायिक रसोई, राहत शिविर, चिकित्सा दल, पशु चिकित्सा दल, पेयजल, खाद्यान्न एवं आपदा नियंत्रण कक्ष को अद्यतन रखा गया है। 1429 पॉलीथीन शीट उपलब्ध अधिकारियों ने बताया कि जिले में फिलहाल 1429 पॉलीथीन शीट उपलब्ध हैं और अतिरिक्त पॉलीथीन शीट की मांग गया जिला से की गई है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत काम के लिए 11 निजी नावों के साथ एकरारनामा किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों को गया और बिहटा से बुलाया जाएगा। स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधन विभाग को दिए गए विशेष निर्देश बैठक में बताया गया कि जिला आपदा प्रबंधन शाखा में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र चौबीसों घंटे कार्यरत है। राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालन के लिए जिले में 86 स्थलों का चयन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संभावित बाढ़, सुखाड़ और महामारी से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं, ओआरएस, आईवी फ्लूड्स, हैलोजन टैबलेट, एंटी स्नेक वेनम और एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध रखी गई हैं। वहीं पशुपालन विभाग की ओर से पशु चिकित्सा दल का गठन और चारा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि विभाग ने आकस्मिक फसल योजना तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेज दी है। अधिकारियों ने बताया कि मानसून में विलंब या कम वर्षा की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक फसलों और अल्प अवधि वाली धान प्रजातियों की खेती के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। जल संसाधन विभाग की ओर से नहरों की मरम्मत, तटबंधों की सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम जारी है। वहीं पथ निर्माण विभाग ने मुख्य सड़कों और पुल-पुलियों की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की जानकारी दी। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने बताया कि हर घर नल-जल योजना के अधिकांश कार्य पूरे कर लिए गए हैं और जल संकट की स्थिति में टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। नगर निकायों की ओर से भी जलजमाव और पेयजल संकट से निपटने की तैयारी की गई है। बचाव काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़, सुखाड़ और भीषण गर्मी को देखते हुए पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रभारी मंत्री ने सभी अंचल अधिकारियों और संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने, राहत सामग्री उपलब्ध रखने और आम लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार चलाने का निर्देश दिया। आपदा की स्थिति में राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा सप्ताह, नुक्कड़ नाटक, फेसबुक लाइव, प्रकाश उत्सर्जक वाहन और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से चलाए जा रहे अभियान की जानकारी भी दी गई। औरंगाबाद के कलेक्ट्रेट स्थित योजना भवन के सभा कक्ष में आज संभावित बाढ़, सुखाड़ और भीषण गर्मी से निपटने की तैयारियों को लेकर जिला स्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की मंत्री सह जिला प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने की। बैठक में जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने के लिए की गई तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा की ओर से प्रभारी मंत्री को पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से दृश्य प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संभावित आपदा से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में पुनपुन, सोन, बटाने, बतरे, अदरी और केसहर प्रमुख नदियां हैं और साल 2021 से 2025 तक सामान्य से कम वर्षापात दर्ज किया गया है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार साल 2026 में भी जून से सितंबर तक सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। बैठक में बताया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में वर्षा मापक यंत्र और स्वचालित मौसम केंद्र सक्रिय हैं। बाढ़ राहत सामग्री, पॉलीथीन शीट, नाव, सामुदायिक रसोई, राहत शिविर, चिकित्सा दल, पशु चिकित्सा दल, पेयजल, खाद्यान्न एवं आपदा नियंत्रण कक्ष को अद्यतन रखा गया है। 1429 पॉलीथीन शीट उपलब्ध अधिकारियों ने बताया कि जिले में फिलहाल 1429 पॉलीथीन शीट उपलब्ध हैं और अतिरिक्त पॉलीथीन शीट की मांग गया जिला से की गई है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत काम के लिए 11 निजी नावों के साथ एकरारनामा किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों को गया और बिहटा से बुलाया जाएगा। स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधन विभाग को दिए गए विशेष निर्देश बैठक में बताया गया कि जिला आपदा प्रबंधन शाखा में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र चौबीसों घंटे कार्यरत है। राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालन के लिए जिले में 86 स्थलों का चयन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संभावित बाढ़, सुखाड़ और महामारी से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं, ओआरएस, आईवी फ्लूड्स, हैलोजन टैबलेट, एंटी स्नेक वेनम और एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध रखी गई हैं। वहीं पशुपालन विभाग की ओर से पशु चिकित्सा दल का गठन और चारा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि विभाग ने आकस्मिक फसल योजना तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेज दी है। अधिकारियों ने बताया कि मानसून में विलंब या कम वर्षा की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक फसलों और अल्प अवधि वाली धान प्रजातियों की खेती के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। जल संसाधन विभाग की ओर से नहरों की मरम्मत, तटबंधों की सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम जारी है। वहीं पथ निर्माण विभाग ने मुख्य सड़कों और पुल-पुलियों की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की जानकारी दी। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने बताया कि हर घर नल-जल योजना के अधिकांश कार्य पूरे कर लिए गए हैं और जल संकट की स्थिति में टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। नगर निकायों की ओर से भी जलजमाव और पेयजल संकट से निपटने की तैयारी की गई है। बचाव काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़, सुखाड़ और भीषण गर्मी को देखते हुए पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रभारी मंत्री ने सभी अंचल अधिकारियों और संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने, राहत सामग्री उपलब्ध रखने और आम लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार चलाने का निर्देश दिया। आपदा की स्थिति में राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बाढ़ सुरक्षा सप्ताह, नुक्कड़ नाटक, फेसबुक लाइव, प्रकाश उत्सर्जक वाहन और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से चलाए जा रहे अभियान की जानकारी भी दी गई।


