शाजापुर में शुक्रवार को पुलिस कंट्रोल रूम में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘जागृति योजना 2025’ के तहत ‘सुरक्षित बचपन सुरक्षित भविष्य’ अभियान के अंतर्गत यह कार्यशाला हुई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो अधिनियम 2012 की जानकारी देना था, जिसमें महिला एवं बाल अपराधों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला में न्यायाधीश रंजीता राव सोलंकी ने पॉक्सो एक्ट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीड़िता को सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। न्यायाधीश सोलंकी ने पुलिस अधिकारियों के लिए व्यवहारिक दक्षता, उच्च स्तरीय पुलिसिंग और नम्र व्यवहार को पीड़ितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नमिता बोरासी ने अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना के बारे में बताया। उन्होंने जानकारी दी कि पीड़ितों के पुनर्वास और सामान्य जीवन यापन के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। एडीपीओ प्रदीप कुमार भटेले ने मामलों में वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्रित करने और उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया। इस कार्यशाला में लगभग 50 महिला पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।


