इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) द्वारा पूर्णिया में डॉप्लर वेदर रडार (DWR) स्थापित किया जा रहा है। यह सीमांचल और उत्तर बिहार के लिए मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। यह बिहार का दूसरा और उत्तर बिहार का पहला डॉप्लर वेदर रडार सिस्टम होगा, जिससे पूर्णिया स्थित मौसम विभाग स्थानीय स्तर पर मौसम की सटीक निगरानी कर सकेगा। पूर्णिया मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी वीरेंद्र कुमार यूझा ने बताया कि रडार लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसे इसी महीने के अंत तक चालू करने की तैयारी है। लगभग 80 फीट ऊंचे इस रडार की मदद से 100 किलोमीटर के दायरे में मौसम की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। ओलावृष्टि और वज्रपात की पहले से चेतावनी मिल सकेगी इस डॉप्लर रडार से आंधी, तूफान, तेज बारिश, ओलावृष्टि और वज्रपात जैसी घटनाओं की पहले से चेतावनी मिल सकेगी। लोगों को 3 घंटे से लेकर 24 घंटे पहले तक मौसम अलर्ट जारी किया जा सकेगा। सीमांचल क्षेत्र में मौसम विश्लेषण अब पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक होगा। अब तक मौसम संबंधी प्रमुख जानकारी पटना से जारी होती थी, लेकिन DWR के शुरू होने के बाद पूर्णिया से ही स्थानीय विश्लेषण संभव हो पाएगा। इस डॉप्लर रडार का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है। समय पर मौसम पूर्वानुमान मिलने से किसान बुवाई और कटाई की बेहतर योजना बना सकेंगे। वे बारिश और ओलावृष्टि से फसल बचाने की तैयारी कर पाएंगे, साथ ही सिंचाई और खाद प्रबंधन सही समय पर कर सकेंगे। किसानों की आय और उत्पादन में वृद्धि होगी फसल नुकसान कम होने से किसानों की आय और उत्पादन में वृद्धि होगी। डॉप्लर वेदर रडार तकनीक हवा की गति, बादलों की स्थिति, वर्षा की तीव्रता और तूफानी गतिविधियों को वास्तविक समय में ट्रैक करती है, जिससे मौसम विभाग को अधिक सटीक और स्थानीय स्तर की चेतावनी जारी करने में मदद मिलती है। इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) द्वारा पूर्णिया में डॉप्लर वेदर रडार (DWR) स्थापित किया जा रहा है। यह सीमांचल और उत्तर बिहार के लिए मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। यह बिहार का दूसरा और उत्तर बिहार का पहला डॉप्लर वेदर रडार सिस्टम होगा, जिससे पूर्णिया स्थित मौसम विभाग स्थानीय स्तर पर मौसम की सटीक निगरानी कर सकेगा। पूर्णिया मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी वीरेंद्र कुमार यूझा ने बताया कि रडार लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसे इसी महीने के अंत तक चालू करने की तैयारी है। लगभग 80 फीट ऊंचे इस रडार की मदद से 100 किलोमीटर के दायरे में मौसम की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। ओलावृष्टि और वज्रपात की पहले से चेतावनी मिल सकेगी इस डॉप्लर रडार से आंधी, तूफान, तेज बारिश, ओलावृष्टि और वज्रपात जैसी घटनाओं की पहले से चेतावनी मिल सकेगी। लोगों को 3 घंटे से लेकर 24 घंटे पहले तक मौसम अलर्ट जारी किया जा सकेगा। सीमांचल क्षेत्र में मौसम विश्लेषण अब पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक होगा। अब तक मौसम संबंधी प्रमुख जानकारी पटना से जारी होती थी, लेकिन DWR के शुरू होने के बाद पूर्णिया से ही स्थानीय विश्लेषण संभव हो पाएगा। इस डॉप्लर रडार का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है। समय पर मौसम पूर्वानुमान मिलने से किसान बुवाई और कटाई की बेहतर योजना बना सकेंगे। वे बारिश और ओलावृष्टि से फसल बचाने की तैयारी कर पाएंगे, साथ ही सिंचाई और खाद प्रबंधन सही समय पर कर सकेंगे। किसानों की आय और उत्पादन में वृद्धि होगी फसल नुकसान कम होने से किसानों की आय और उत्पादन में वृद्धि होगी। डॉप्लर वेदर रडार तकनीक हवा की गति, बादलों की स्थिति, वर्षा की तीव्रता और तूफानी गतिविधियों को वास्तविक समय में ट्रैक करती है, जिससे मौसम विभाग को अधिक सटीक और स्थानीय स्तर की चेतावनी जारी करने में मदद मिलती है।


